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Ram Prakash Kasaudhan
Gorakhpurलगभग १ घंटा पहले

*स्कूल खुला... बच्चे मौजूद... लेकिन गुरुजी गायब! त्रिलोकपुर के स्कूल में शिक्षा

*स्कूल खुला... बच्चे मौजूद... लेकिन गुरुजी गायब! त्रिलोकपुर के स्कूल में शिक्षा

*स्कूल खुला... बच्चे मौजूद... लेकिन गुरुजी गायब! त्रिलोकपुर के स्कूल में शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल* नेक्स्ट अपडेट न्यूज़ | बेलघाट/गोरखपुर ये स्कूल है या सिर्फ हाजिरी और कागजी कार्रवाई का अड्डा? स्कूल में बच्चे मौजूद हैं... रसोईया मौजूद हैं... लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षक ही नदारद! गोरखपुर के बेलघाट क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय त्रिलोकपुर से सामने आई तस्वीरें सरकारी शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। ग्राम प्रधान राजेश जायसवाल की शिकायत के बाद जब विद्यालय की पड़ताल की गई, तो मौके पर प्रधानाध्यापक शिवरतन निषाद मौजूद मिले, लेकिन अन्य शिक्षकों की गैरमौजूदगी सवालों के घेरे में रही। उधर बच्चे स्कूल परिसर में खेलते नजर आए। बच्चों ने जो बताया, वह और भी चौंकाने वाला है। बच्चों के मुताबिक शिक्षक कभी 9 बजे आते हैं, कभी 10 बजे और कई बार आते ही नहीं। अब सवाल सीधा है— अगर शिक्षक समय पर स्कूल ही नहीं पहुंचेंगे, तो बच्चों की पढ़ाई कौन कराएगा? सुबह करीब 8:30 बजे स्कूल की सफाई कर रहीं मीना देवी और प्रभावती देवी ने भी बताया कि उस समय तक अन्य शिक्षक विद्यालय में मौजूद नहीं थे। ग्राम प्रधान का आरोप है कि विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापक अशोक कुमार मिश्रा, सहायक अध्यापक सोनम यादव और शिक्षामित्र रजनी सिंह के समय पर विद्यालय नहीं पहुंचने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। लेकिन मामला सिर्फ शिक्षकों की कथित देरी तक सीमित नहीं है। ग्राम प्रधान का दावा है कि मुख्यमंत्री पोर्टल, जिलाधिकारी, एडी बेसिक और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तक शिकायतें की गईं। तो फिर सवाल— शिकायतें हुईं तो जांच कहां हुई? जांच हुई तो कार्रवाई कहां हुई? और अगर कार्रवाई हुई तो स्कूल की जमीन पर उसका असर क्यों नहीं दिख रहा? ग्राम प्रधान ने खंड शिक्षा अधिकारी बेलघाट पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं और दावा किया है कि शिकायतों का मौके पर सत्यापन किए बिना ही निस्तारण कर दिया गया। क्या वाकई शिकायतों की जांच सिर्फ कागजों तक सीमित रही? या फिर शिकायतों का निस्तारण सिर्फ फाइल बंद करने तक था? हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जब खंड शिक्षा अधिकारी बेलघाट सावन कुमार दुबे से बात की गई तो उन्होंने मामले की जानकारी होने से इनकार किया और जांच कराकर उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है। लेकिन सवाल आज भी खड़ा है— स्कूल में बच्चे अपने भविष्य की उम्मीद लेकर पहुंच रहे हैं... क्या जिम्मेदार शिक्षक और अधिकारी भी उसी गंभीरता से अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं? अगर गुरुजी समय पर नहीं आएंगे, तो बच्चों का भविष्य समय पर कैसे बनेगा? *अब निगाहें जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।*

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