दिहाड़ी' 'मजदूरों' में 'पुलिस' ढूंढ रही पीसीएफ कर्मी के 'घर' की 'चोरी' के 'चोर'

दिहाड़ी' 'मजदूरों' में 'पुलिस' ढूंढ रही पीसीएफ कर्मी के 'घर' की 'चोरी' के 'चोर' बीते बुधवार को ₹50हजार की नगदी व 20 लाख के जेवरातों की हुई थी चोरी! चोरी वाले घर के समीप काम करने वाले ठेकेदार व दिहाड़ी मजदूरों को पुलिस ने उठाया! चार दिन से पुलिस गिरफ्त में दिहाड़ी मजदूर,चोरी का नहीं लगा सुराग! शहर ही नहीं जिले में बढ़ी चोरी,लूट छिनैती की घटनाएं! चोरी खोल पाने में नाकाम हो रही पुलिस,गस्त पर भी उठ रहे सवाल! घटनाओं के खुलासों पर संदेह,चोरों के बढ़े हौसले! गरीब मजदूरों का परिवार कोतवाली के लगा रहा चक्कर,चूल्हा जलने का भी संकट! मजदूरों के पकड़ने-छोड़ने का सिलसिला जारी,किसी नतीजे में नहीं पहुंची खाकी! फतेहपुर में इन दिनों लाख प्रयासों के बावजूद भी पुलिस चोरों पर अंकुश लगाने में नाकाम रही है।आए दिन होने वाली चोरियां लोगों के लिए सिर दर्द बनी हुई हैं। ये चोरों के बढ़े हौसलों का नमूना है या फिर पुलिस की नाकामी।सदर कोतवाली क्षेत्र के शिवपुरम में चार दिन पहले पीसीएफ कर्मी के घर हुई ₹20 लाख की चोरी में पुलिस दिहाड़ी मजदूरों में चोर लुटेरे ढूंढने में लगी है। इसी का नतीजा है कि चोरी वाले घर के समीप काम करने वाले मजदूरों एवं ठेकेदार को पुलिस ने बैठा रखा है। एक के बाद एक तरीके से पूंछतांछ का सिलसिला जारी है लेकिन चोरी के खुलासे के एक कदम आगे भी खाकी नहीं बढ़ सकी है। खागा कोतवाली क्षेत्र के ब्राह्मणपुर निवासी आनंद कुमार त्रिवेदी सदर कोतवाली के शिवपुरम कॉलोनी में रह रहे हैं।वह पीसीएफ में काम करते हैं। सुनसान घर में गत 6 मई को चोरों ने ₹50000 की नगदी एवं 20 लाख रुपए के जेवरात पार कर दिए।यह कोई पहली या नई घटना नहीं है।शहर ही नहीं पूरे जिले में चोरी,लूट,छिनैती की घटनाओं में बाढ़ सी आ गई है। पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक के उठाए जा रहे कारगर कदमों के बावजूद चोरी की घटनाएं बेतहाशा बढ़ी हुई हैं। होने वाली चोरियों के खुलासे के दावे भी खाकी कर रही है लेकिन सवाल यह है कि जो घटनाएं खुल रही हैं!क्या उसके सही चोर एवं माल की बरामदगी हो रही है या फिर अपनी पीठ थपथपाने के लिए ही पुलिस खुलासे कर रही है। पीसीएफ कर्मी के यहां हुई चोरी के खुलासे को लेकर भी पुलिस तेज जरूर है लेकिन चोरी वाले घर के समीप एक मकान में चल रहे काम कर रहे ठेकेदार एवं मजदूर पुलिस के शक दायरे में हैं।उन्हें उठाया गया है। एक के बाद एक अधिकारी उनसे पूंछतांछ कर रहे हैं लेकिन चोरी के खुलासे के एक कदम भी आगे पुलिस नहीं बढ़ पाई है। जिन गरीब दिहाड़ी मजदूरों से शक के चलते पूंछतांछ की जा रही है उनके घर वाले एवं मोहल्ले के लोग पुलिस पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनका कहना है कि ये रोज कमाने रोज खाने वाले मजदूर हैं जो मजदूरी करके अपना परिवार चलाते हैं। असली चोरों को पकड़ने के बजाय चार दिन से उन्हें बैठाल कर रखा गया है जिससे घर के लोग तो परेशान हैं वो तो हैं ही साथ ही साथ घर का चूल्हा जलने का भी संकट खड़ा हो रहा है। दिहाड़ी मजदूरों की गिरफ्तारी से *एक बात तो तय है कि इनमें किसी ना किसी का चालान करने की ओर पुलिस आगे बढ़ चुकी है फिर वह चोर हो या ना हो। सुस्त पड़ी रात गस्त ने चोरों के हौसले बुलंद कर रखे हैं तो पुलिस की ऐसी कार्यशैली भी उनके हौसलों को और बल देने के लिए काफी हैं। पीसीएफ कर्मी के घर हुई चोरी के असल चोर कब पकड़ में आएंगे,खुलासा कब होगा?यह तो भविष्य के गर्भ में है!लेकिन मजदूरों के पकड़ने एवं छोड़ने पर भी सवाल हैं।फिलहाल गिरफ्त में आए दिहाड़ी मजदूरों की सांसें फूल रही हैं।