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Lucknow९ मिनट पहले

लखनऊ में 5000 करोड़ से भूमिगत होंगे बिजली तार, 2030 तक पूरा

लखनऊ में 5000 करोड़ से भूमिगत होंगे बिजली तार, 2030 तक पूरा

लखनऊ में 5000 करोड़ से भूमिगत होंगे बिजली तार, 2030 तक पूरा होगा काम, डीपीआर मांगी गई लखनऊ में करीब 5000 करोड़ रुपये की लागत से बिजली के तारों को भूमिगत किया जाएगा, जिससे शहर की बिजली व्यवस्था बेहतर होगी। इस योजना से हादसे कम होंगे और सौंदर्य बढ़ेगा। हालांकि, फॉल्ट खोजने और मरम्मत में तकनीकी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। राजधानी में अनुमानित 5000 करोड़ की लागत से बिजली के तारों भूमिगत किया जाएगा। बिजली महकमे को यह कार्य वर्ष 2030 तक पूरा करना पड़ेगा। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के निदेशक (तकनीकी) हरीश बंसल ने लखनऊ के चारों जोनल मुख्य अभियंताओं से इस योजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तीन दिन में मांगी है। शुक्रवार को निदेशक ने इस संबंध में मध्यांचल निगम मुख्यालय पर एक बैठक का आयोजन किया। इसमें जोनल मुख्य अभियंता अमौसी रामकुमार, लखनऊ मध्य के रवि कुमार अग्रवाल, जानकीपुरम के वीपी सिंह और गोमतीनगर के सुशील गर्ग ने तकनीकी टीम के साथ में शिरकत की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य रक्षामंत्री राजनाथ के संसदीय क्षेत्र में आने वाले पांचों विधान सभा क्षेत्रों की बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तारों को भूमिगत करने का था। निदेशक ने कार्ययोजना पर चर्चा करते हुए सभी जोनल मुख्य अभियंताओं से अलग-अलग डीपीआर तैयार कर आगामी मंगलवार तक उपलब्ध कराने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि बिजली व्यवस्था में यह सुधार कार्य केंद्र की विशेष योजना के तहत होगा जिसका खर्च केंद्र सरकार उठाएगी। पांच विस क्षेत्रों में नजर नहीं आएंगे खंभे और तार रक्षामंत्री के संसदीय क्षेत्र में पांच विधान सभा क्षेत्र आते हैं। इनमें लखनऊ पूर्व, लखनऊ पश्चिम, लखनऊ मध्य, लखनऊ उत्तर व कैंट विधान सभा शामिल हैं। इन विधान सभा क्षेत्र के प्रमुख रूप से गोमतीनगर, इंदिरानगर, चिनहट, गोमतीनगर विस्तार, महानगर, अलीगंज, डालीगंज, हजरतगंज, हुसैनगंज, चारबाग, आलमबाग, छावनी, राजाजीपुरम, पुराना शहर, अमीनाबाद सहित आसपास के इलाके हैं। सभी जोनल मुख्य अभियंता विधान सभावार सड़कों व गलियों से खंभे-तारों को हटाने की रिपोर्ट तैयार करेंगे। यहां पहले से भूमिगत हैं तार मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने अपने संसाधनों से अमीनाबाद, चौक बाजार में घनी आबादी को देखते हुए बिजली के तारों को भूमिगत किया है। इन इलाकों में 75 फीसदी काम हो भी चुका है। अब केंद्र सरकार की योजना से यहां शत-प्रतिशत तारों को भूमिगत किया जाएगा।   लखनऊ होगा यूपी का तीसरा शहर प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में सबसे पहले तारों का भूमिगत की योजना शुरू हुई। वहां कार्य का एक चरण पूरा हो चुका है। दूसरे और तीसरे चरण पर कार्य चल रहा है। नोएडा में भी इस योजना के लिए मंजूरी केंद्र सरकार से मिल चुकी है। लखनऊ तीसरा शहर होगा जहां तारों को भूमिगत किया जाएगा।   योजना से होंगे ये फायदे बाजार और मोहल्ले से बिजली के तारों के भूमिगत होने से खंभों पर मकड़जाल हटेगा। आंधी-पानी के दौरान उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति में कम व्यवधान आएगा। बाजारों में सड़क किनारे से खंभे और तार हटने से सड़कों पर ज्यादा जगह मिलेगी। तार टूटने और खंभों में करंट उतरने जैसे हादसे न्यूनतम हो जाएंगे। खंभों के हटने से सड़क और फुटपाथ की खूबसूरती बढ़ेगी। कार्ययोजना में ये हैं चुनौतियां फॉल्ट आने पर उसकी खोजबीन करने में कभी-कभी बड़ी मुश्किल आती है। निदान में ज्यादा समय लगता है। मानकों के अनुरूप कार्य न हुए तो एलटी लाइन में ज्यादा फॉल्ट आने के मामले आ सकते हैं। भूमिगत तारों में फॉल्ट खोजने और उनकी मरम्मत के लिए विशेषज्ञों की आवश्यकता पड़ेगी।

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