शंकरपुर में चकरोड छोड़ काश्तकारी भूमि पर इंटरलॉकिंग का आरोप, ग्रामीण विधवा

शंकरपुर में चकरोड छोड़ काश्तकारी भूमि पर इंटरलॉकिंग का आरोप, ग्रामीण विधवा महिला ने डीएम से लगाई गुहार जखनिया (गाजीपुर): स्थानीय विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत शंकरपुर में इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीण विधवा महिला ने आरोप लगाया है कि चकरोड की निर्धारित भूमि पर कार्य कराने के बजाय काश्तकारी भूमि पर इंटरलॉकिंग कराई जा रही है, जबकि संबंधित गाटा संख्या पर पूर्व में अवैध कब्जाधारियों के विरुद्ध प्रशासन द्वारा बेदखली और क्षतिपूर्ति की कार्यवाही आदेशित है। मामले को लेकर ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत शंकरपुर स्थित गाटा संख्या 527/525, जो कि चकरोड की भूमि के रूप में दर्ज है, पर अवैध कब्जा किए जाने की शिकायत पूर्व में प्रशासन को मिली थी। इस पर संज्ञान लेते हुए पूर्व तहसीलदार जखनिया ने जांच कर संबंधित व्यक्ति तुलसीराम पुत्र रामप्रसाद के विरुद्ध बेदखली की कार्रवाई की थी। साथ ही उन पर 10 हजार रुपये की आर्थिक क्षतिपूर्ति भी आरोपित की गई थी। प्रशासनिक आदेश के बावजूद कब्जा नहीं हटा है। ग्रामीणों का आरोप है कि अब जबकि चकरोड की भूमि अतिक्रमण मुक्त के लिए आदेशित हो चुकी है, वहां इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण कराया जाना चाहिए था। किंतु वर्तमान प्रधान प्रतिनिधि द्वारा उक्त स्थान को छोड़ते हुए काश्तकारी भूमि पर इंटरलॉकिंग का कार्य प्रारंभ करा दिया गया है। इससे गांव में पुनः विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई है। गांव की निवासी श्याम कुमारी पत्नी रामकृत राम ने इस संबंध में उप जिलाधिकारी जखनिया एवं जिलाधिकारी गाजीपुर को प्रार्थना-पत्र सौंपकर आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि प्रशासन द्वारा जिस भूमि को चकरोड के रूप में चिन्हित कर अतिक्रमण हटाने के लिए आदेशित है, उसी भूमि पर विकास कार्य कराया जाना न्यायोचित होगा। काश्तकारी भूमि पर इंटरलॉकिंग कराना न केवल नियमों के विपरीत है, बल्कि भविष्य में कानूनी जटिलताओं को भी जन्म दे सकता है। प्रार्थिनी ने यह भी कहा है कि यदि गलत स्थान पर निर्माण कार्य कराया गया तो इससे ग्रामवासियों को वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा और सरकारी धन का दुरुपयोग होने की आशंका बनी रहेगी। उन्होंने प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराते हुए निर्धारित चकरोड की भूमि पर ही इंटरलॉकिंग कार्य सुनिश्चित कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि चकरोड गांव के आवागमन का प्रमुख मार्ग है, जिस पर इंटरलॉकिंग होने से लोगों को सुविधा मिलती। यदि काश्तकारी भूमि पर निर्माण कराया गया तो भविष्य में निजी स्वामित्व को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है। फिलहाल मामला प्रशासन के संज्ञान में है। जांच उपरांत ही स्पष्ट हो सकेगा कि इंटरलॉकिंग कार्य किस आधार पर कराया जा रहा है और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।