यूपी स्मार्ट प्रीपेड मीटर जांच मामला गरमाया, उपभोक्ता परिषद ने NABL व

यूपी स्मार्ट प्रीपेड मीटर जांच मामला गरमाया, उपभोक्ता परिषद ने NABL व आयोग में दायर किया लोक महत्त्व प्रस्ताव स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की जांच को लेकर विवाद बढ़ गया है। उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया कि जांच ऐसी लैब में कराई गई, जिसे संबंधित मानकों के तहत अधिकृत नहीं किया गया था। मामले की शिकायत राष्ट्रीय मान्यता बोर्ड में की गई है और नियामक आयोग में लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल कर उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई गई है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर जांच का मामला गरमाता जा रहा है। पूरे मामले की शिकायत नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेट्रीज (एनएबीएल) में की गई है। साथ ही नियामक आयोग में भी लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल करके लैब की वैधानिकता की जांच कराने और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई है।मुख्यमंत्री के निर्देश पर स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की जांच के लिए तकनीकी कमेटी का गठन किया गया। कमेटी ने मीटरों की जांच मध्यांचल की लैब में कराई। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि मध्यांचल की लैब प्रीपेड स्मार्ट मीटर की जांच के लिए अधिकृत नहीं है। जबकि मध्यांचल ने खुद के पास लाइसेंस होने का दावा किया। ऐसे में शुक्रवार को राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने पूरे मामले में नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेट्रीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को शिकायती प्रस्ताव भेजा है। बताया कि मध्यांचल की लैब में एनएबीएल द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटर के भारतीय मानक आईएस 16444 के अंतर्गत परीक्षण का लाइसेंस नहीं है। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के मानकों की जांच इसी लैब में की जा रही है। ऐसे में एनएबीएल की ओर से उपभोक्ता परिषद को बताया गया कि उनका शिकायती पत्र स्वीकार कर उसकी समीक्षा शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा शुक्रवार दोपहर बाद विद्युत नियामक आयोग पहुंचे। लोक महतव प्रस्ताव दाखिल किया। आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटरों के परीक्षण में गलत लैब का प्रयोग किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।