छानी महोत्सव: श्रीमद्भागवत कथा में सुदामा चरित सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, राजा परीक्षित को मिली मुक

आध्यात्मिक भक्ति और पारंपरिक खेलों का अनूठा संगम, विशाल दंगल में दिखा पहलवानों का दमखम बीवांर/हमीरपुर। ग्राम छानी में आयोजित 41वें वार्षिक ग्यारह कुंडीय श्री गायत्री महायज्ञ के आठवें दिन आध्यात्मिक श्रद्धा और लोक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। एक ओर श्रीमद्भागवत कथा के समापन सत्र में श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए, वहीं दूसरी ओर दो दिवसीय विशाल दंगल ने खेल प्रेमियों में खासा उत्साह भर दिया। सुदामा चरित और परीक्षित मोक्ष से भावविभोर हुआ पंडाल मुख्य पंडाल में कथा वाचक पंडित लखन लाल जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की निष्कलंक मित्रता का मार्मिक वर्णन किया। सुदामा के द्वारका आगमन और भगवान कृष्ण द्वारा नंगे पांव दौड़कर मित्र को गले लगाने के प्रसंग ने श्रद्धालुओं की आंखें नम कर दीं। इसके बाद राजा परीक्षित की मुक्ति के प्रसंग के साथ श्रीमद्भागवत कथा का विधिविधान से समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भागवत भगवान की आरती उतारी और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। विशाल दंगल में दूर-दराज के पहलवानों ने आजमाया भाग्य गायत्री महायज्ञ महोत्सव के अवसर पर आयोजित दो दिवसीय विशाल दंगल (2 व 3 फरवरी) आकर्षण का केंद्र रहा। उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों से आए नामी पहलवानों ने अखाड़े में अपने कौशल और शक्ति का प्रदर्शन किया। मिट्टी के अखाड़े में चली कुश्तियों को देखने के लिए छानी सहित आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों दर्शक उमड़े। विजेता पहलवानों को नव युवक यज्ञ समिति द्वारा सम्मानित किया गया। दंगल की सबसे बड़ी कुश्ती विवेक (बांदा) और शोएब (लखनऊ) के बीच हुई, जिसमें शोएब ने विवेक को पराजित कर ₹5000 की पुरस्कार राशि अपने नाम की। वहीं सुलखान (उन्नाव) ने उपेन्द्र को हराया, जबकि अंकित धौहल और अंकित इंगोहटा के बीच मुकाबला बराबरी पर छूटा। इन लोगों का रहा विशेष योगदान इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में अमर सिंह (भाऊ), अरुण कुमार वर्मा (प्रधान प्रतिनिधि, छानी खुर्द), जिला पंचायत सदस्य हरगोविंद प्रजापति, पूर्व प्रधान धर्म सिंह (भाऊ), बच्चा श्रीवास, गंगा चरण प्रजापति, श्री विलास शिवहरे, भारत सिंह यादव (प्रधान, छानी बुजुर्ग), अंकित शिवहरे, शिवाकांत पाण्डेय, संचालनकर्ता कमलेश श्रीवास सहित महोत्सव समिति के सदस्यों का विशेष योगदान रहा। कलश यात्रा से शुरू हुआ यह वार्षिक महोत्सव 3 फरवरी को विशाल भंडारे के साथ संपन्न होगा।