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Gazipurलगभग २ घंटे पहले

गुरु पूर्णिमा पर गुरु-शिष्य परंपरा का अद्भुत संगम, वैदिक अनुष्ठान, दिव्य सत्संग

गुरु पूर्णिमा पर गुरु-शिष्य परंपरा का अद्भुत संगम, वैदिक अनुष्ठान, दिव्य सत्संग

गुरु पूर्णिमा पर गुरु-शिष्य परंपरा का अद्भुत संगम, वैदिक अनुष्ठान, दिव्य सत्संग व भव्य भंडारे का हुआ आयोजन जखनिया (गाजीपुर)। भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है। इसी सनातन गुरु-शिष्य परंपरा का अनुपम उदाहरण बुधवार को गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर तहसील जखनिया के जखनिया सीएचसी केंद्र के पीछे देखने को मिला। विद्वान आचार्य पंडित दिनेश जी महाराज एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती शशिकला देवी के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन, धार्मिक अनुष्ठान, दिव्य सत्संग, गुरु वंदना तथा आरती का भव्य आयोजन किया गया। पूरे आयोजन में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण की अलौकिक छटा देखने को मिली।कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार हवन-पूजन से हुई। इसके पश्चात आयोजित दिव्य सत्संग में पंडित दिनेश जी महाराज ने गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु ही मनुष्य को अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपने जीवन में सदैव सदाचार, सेवा, संस्कार और धर्म के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर शिष्यों ने अपने गुरु का पूजन-अर्चन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। गुरु-शिष्य परंपरा की यह भावपूर्ण झलक उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक रही। आयोजन के दौरान भजन-कीर्तन और गुरु वंदना से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।धार्मिक अनुष्ठान के उपरांत श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे एवं प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।इस अवसर पर प्रमुख शिष्यों में दयाशंकर त्रिपाठी, विशाल जी, अमित यादव, विनीत तिवारी, भारत सिंह, अवधेश सिंह कुशवाहा, सहतू यादव, लालजी पांडेय, कृष्णानंद तिवारी, धर्मदेव यादव, नारायण सिंह, राम प्रताप सहित बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष श्रद्धालु तथा सम्मानित शिष्य मंडली उपस्थित रही।गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन जखनिया क्षेत्र में श्रद्धा, आस्था और भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण का जीवंत उदाहरण बन गया। पूरे आयोजन ने उपस्थित श्रद्धालुओं के मन में आध्यात्मिक ऊर्जा, संस्कार और गुरु के प्रति समर्पण की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।

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