गोरखपुर: जनसुविधाओं और भ्रष्टाचार को लेकर चौतरफा घिरी सरकार; बसपा नेता ने

गोरखपुर: जनसुविधाओं और भ्रष्टाचार को लेकर चौतरफा घिरी सरकार; बसपा नेता ने अस्पताल की बदहाली उठाई, पूर्व प्रोफेसर ने दी आमरण अनशन की चेतावनी गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर से स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली और उच्च शिक्षा विभाग में कथित उत्पीड़न व भ्रष्टाचार के दो बेहद गंभीर मामले सामने आए हैं। एक तरफ जहाँ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद प्रत्याशी जावेद सिमनानी ने जिला अस्पताल की दयनीय स्थिति को लेकर मोर्चा खोला है, वहीं दूसरी ओर दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के एक पूर्व प्रोफेसर ने अपनी बहाली और न्याय की मांग को लेकर 10 जून से जिलाधिकारी (DM) कार्यालय पर आमरण अनशन पर बैठने का ऐलान कर दिया है। 1. शाम 4 बजे के बाद भगवान भरोसे जिला अस्पताल, BRD मेडिकल कॉलेज पर बढ़ा भारी दबाव बसपा नेता जावेद सिमनानी (पूर्व सांसद प्रत्याशी, लोकसभा 64 सदर गोरखपुर) ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक आधिकारिक पत्र भेजकर नेता जी सुभाष चन्द्र बोस जिला अस्पताल, गोरखपुर की आपातकालीन (Emergency) सुविधाओं की पोल खोली है। पत्र की मुख्य बातें: शाम 4 बजे के बाद ठप हो जाती हैं जाँचें: अस्पताल में शाम 4 बजे के बाद किसी भी प्रकार की चिकित्सीय जाँच (पैथोलॉजी/एक्स-रे आदि) उपलब्ध नहीं होती है। मरीजों को किया जा रहा है रेफर: समुचित जाँच न होने के कारण डॉक्टर गंभीर और सामान्य, दोनों ही तरह के मरीजों को बी.आर.डी. (BRD) मेडिकल कॉलेज रेफर कर देते हैं। BRD मेडिकल कॉलेज में मची अफरा-तफरी: जिला अस्पताल की लापरवाही के कारण बी.आर.डी. मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या अनावश्यक रूप से बढ़ गई है, जिससे वहाँ भी अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई है। बसपा नेता की मांग: मुख्यमंत्री के गृह जनपद की इस संवेदनशील स्थिति को देखते हुए जावेद सिमनानी ने मांग की है कि जिला अस्पताल में 24 घंटे सभी प्रकार की जाँच और आपातकालीन सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए विशेष निर्देश जारी किए जाएं। 2. '18 साल से रोज थोड़ा-थोड़ा मर रहा हूँ' — विवि प्रशासन के खिलाफ 10 जून से आमरण अनशन पर बैठेंगे डॉ. संपूर्णानंद मल्ल दूसरा मामला दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से जुड़ा है, जहाँ प्राचीन इतिहास पुरातत्व संस्कृति (AHAC) विभाग में कार्यरत रहे डॉ. संपूर्णानंद मल्ल 'पूर्वांचल गांधी' ने एक प्रेस वार्ता के जरिए विवि प्रशासन और पूर्व कुलपतियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने 10 जून से जिलाधिकारी कार्यालय पर आमरण अनशन (Hunger Strike) शुरू करने की घोषणा की है। डॉ. मल्ल के गंभीर आरोप और मांगें: गलत नियमों का हवाला देकर निकाला: डॉ. मल्ल का आरोप है कि सत्र 2007-08 में तत्कालीन कार्यवाहक कुलपति एके मित्तल ने एक कूटरचित (फर्जी) पत्र और नियमों की मनमानी व्याख्या करके उन्हें अयोग्य ठहराया और नौकरी से निकाल दिया, जबकि वह पीजी प्रथम श्रेणी, यूजीसी नेट, जेआरएफ और एएसआई (ASI) क्वालिफाइड हैं। भ्रष्टाचार और हत्या के आरोप की मांग: उन्होंने वर्तमान विवि प्रशासन पर 'यूजीसी रेगुलेशन' की हत्या करने का आरोप लगाते हुए तत्कालीन दोषियों पर 'मजिस्ट्रेटी जांच' कराने और वर्तमान कुलपति (VC) को बर्खास्त करने की मांग की है। 10 करोड़ के मुआवजे की मांग: गलत तरीके से सेवा समाप्त किए जाने के कारण मानसिक पीड़ा और मानहानि के एवज में उन्होंने 10 करोड़ रुपये के मुआवजे और अगस्त 2003 की नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता के आधार पर वेतन व भत्तों के भुगतान की मांग की है। पेड़ कटवाने और छात्र को प्रताड़ित करने का आरोप: उन्होंने विवि प्रशासन पर बिना अनुमति हजारों पेड़ कटवाने और एक बीटेक छात्र (धर्मेंद्र चौधरी) को आत्महत्या के लिए विवश करने जैसे सनसनीखेज आरोप भी लगाए हैं। यह पत्र उन्होंने माननीय राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को प्रतिलिपि के रूप में भेजा है। निष्कर्ष गोरखपुर में एक साथ सामने आए इन दोनों मामलों ने प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री के गृह जनपद में इन गंभीर मुद्दों पर शासन और प्रशासन क्या एक्शन लेता है।