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Sonbhadraलगभग २ घंटे पहले

* अब डकैती पर उतारू: गजब दुस्साहसिक हो चले हैं ओबरा के कबाड़ चोर और नशेड़ी

* अब डकैती पर उतारू: गजब दुस्साहसिक हो चले हैं ओबरा के कबाड़ चोर  और नशेड़ी

* अब डकैती पर उतारू: गजब दुस्साहसिक हो चले हैं ओबरा के कबाड़ चोर कबाड़ी और नशेड़ी * -दिन दहाड़े मंगलवार सुबह दस बजे वीआईपी रोड कान्वेंट के सामने बंद पड़े प्रेस कार्यालय का टिन शेड बेखौफ डकैती के अंदाज में ढहाया, ले जाने की फ़िराक़ में रहे, तेज़ आवाज़ आसपास की सक्रियता से भागे कबाड़ी। ओबरा, सोनभद्र )। ओबरा थाना अंतर्गत मंगलवार 28 अप्रैल 2026 को सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल के सामने ओबरा शापिंग परिसर मे, दिनदहाड़े, व्यस्त सड़क और दुकानें खुली होने के बावजूद ठेला लेकर आये दुस्साहसिक कबाड़ चोरों ने बंद पड़े संयुक्त प्रेस कार्यालय के सामने लगे टिन शेड को फिल्मी डकैतों के अंदाज़ में ढहा दिया। शेड गिरते ही हुई तेज़ आवाज़, अगल बगल की सक्रियता और तत्परता देख कबाड़ चोरों को भागना पड़ा। सूचना मिलते ही कार्यालय स्वामी ने डायल 112 को घटना की जानकारी देते हुए मौके पर पहुंचे और पुलिस को बयान दर्ज कराते हुए नुकसान और चोरों की कारस्तानी का जायज़ा लिया। मौजूद भीड़ ने डायल 112 को सलाह दिया कि स्कूल एवं आसपास लगे सीसीटीवी से कबाड़ चोरों तक पंहुचा जा सकता है। कबाड़ चोरों ने दूसरी बार कार्यालय पर धावा बोला। पहली बार ओबरा थानाध्यक्ष मिथिलेश मिश्रा के कार्यकाल में कार्यालय का ताला तोड़ अंदर से कुर्सी, मेज, कम्प्यूटर, सीपीयू सेट, सीलिंग फैन, इन्वर्टर, बैटरी व आफिस की सारी पत्रावली, स्टेशनरी समेत दरवाजा तक उखाड़ ले गये थे, तब भी डायल 112 समेत थाने में घटना की सूचना दी गई थी, कार्रवाई के अभाव में मनबढ़ कबाड़ चोरों ने मंगलवार को बेखौफ डकैतों के अंदाज़ में दिन दहाड़े, टिन शेड पर धावा बोला और एक साथ पूरा शेड ही ढहा दिया। तेज़ आवाज़, आसपास की सक्रियता से उनकी कबाड़ चोरी की मंशा विफल हो गई। बता दें कि परियोजना प्रबंधन द्वारा ओबरा शापिंग कांप्लेक्स में बेरोज़गारी प्रबंधन और कर्मचारियों की सुविधा व एक ही परिसर में आवश्यक सामानों की उपलब्धता हेतु वर्ष 1997 में लगभग डेढ़ दर्जन दुकानें/चबूतरा आवंटित किया था। परियोजना प्रबंधन द्वारा दुकानों के सामने सड़क की पटरी से दीवार उठा दिए जाने से जहां दुकानदार बेरोजगार हो गए वहीं कांप्लेक्स की सारी दुकानों को आये दिन कबाड़ चोर निशाना बनाकर जहां खंखाड़ करते चले जा रहे हैं। बंद दुकानों के टिन शेड, गुमटियां, लोहे के दरवाजे तोड़ कर बेखौफ बेच दे रहे हैं। दीवार उठ जाने से पूरा कांप्लेक्स जरायमपेशा/कबाड़ियों/नशेड़ियों का अड्डा बनता जा रहा है रात में तो बाउंड्री उस पार असमाजिक तत्वों का साम्राज्य स्थापित हो जाता है, परियोजना सम्पत्तियों के प्रहरी भूतपूर्व सैनिक भी कहीं न कहीं लम्बे समय से उदासीन पड़े हैं। -------

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