*तहसील प्रांगण में ग्राम न्यायालय और जानलेवा औद्योगिक प्रदूषण के खिलाफ* *अधिवक्ताओं
*तहसील प्रांगण में ग्राम न्यायालय और जानलेवा औद्योगिक प्रदूषण के खिलाफ* *अधिवक्ताओं का बिगुल, 15 दिन का अल्टीमेटम* सहजनवा, गोरखपुर 19 सितंबर 2026 तहसील सहजनवा में ग्राम न्यायालय की स्थापना और गीडा (GIDA) औद्योगिक क्षेत्र से फैल रहे जानलेवा प्रदूषण के खिलाफ तहसील बार एसोसिएशन सहजनवा का 5 महीने से चल रहा शांतिपूर्ण आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बार एसोसिएशन ने शुक्रवार को प्रशासन को सौंपे गए ज्ञापन में चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर जनहित के इन दो गंभीर मुद्दों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो अधिवक्ता समाज स्थानीय किसानों, व्यापारियों और ग्रामीणों के साथ आंदोलन को उग्र करने तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का दरवाजा खटखटाने को बाध्य होगा। *5 महीने से हर शनिवार को दे रहे धरना* ज्ञापन में बताया गया कि बार एसोसिएशन पिछले 5 महीनों से प्रत्येक माह के पहले और तीसरे शनिवार को दोपहर 11 बजे से 2 बजे तक लगातार धरना-प्रदर्शन कर प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। बार एसोसिएशन ने दो मुख्य समस्याओं को उजागर किया है न्याय से वंचित हो रही गरीब जनता ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 के तहत ग्रामीण और गरीब जनता को घर के पास सुलभ, त्वरित और सस्ता न्याय मिलना चाहिए। लेकिन सहजनवा तहसील में ग्राम न्यायालय की स्थापना वर्षों से लंबित है। इसके अभाव में दूर-दराज के गरीब फरियादियों को छोटे-छोटे वादों के लिए भी जिला न्यायालय गोरखपुर के चक्कर काटने पड़ते हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है। सहजनवा और गीडा क्षेत्र की कुछ फैक्ट्रियों द्वारा प्रदूषण नियंत्रण मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। फैक्ट्रियों से निकलने वाला जहरीला धुआं हवा में जहर घोल रहा है, वहीं बिना ट्रीटमेंट के बहाया जा रहा रासायनिक कचरा भूजल और स्थानीय जलस्रोतों को जहरीला बना रहा है। अधिवक्ताओं का आरोप है कि इसके कारण क्षेत्र में कैंसर, अस्थमा जैसी सांस की बीमारियों, त्वचा रोग और किडनी फेलियर जैसी घातक बीमारियों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। मांग-1 तहसील सहजनवा में ग्राम न्यायालय की स्थापना की प्रशासनिक प्रक्रिया तत्काल पूरी कर शासन को अंतिम संस्तुति भेजी जाए। मांग-2 प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक विशेष टीम गठित कर सहजनवा और गीडा की फैक्ट्रियों के वायु और जल उत्सर्जन की औचक (सरप्राइज) जांच कराई जाए। मांग-3 मानकों का उल्लंघन करने वाली और बिना वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के चल रही फैक्ट्रियों को तत्काल सील कर क्लोजर नोटिस जारी किया जाए। अनिल त्रिपाठी पूर्व मंत्र, के के त्रिपाठी, राघवेंद्र त्रिपाठी, यशवंत भारतीय, शैलेंद्र कुमार श्रीवास्तव, सुग्रीव यादव एडवोकेट, रमेश कुमार कनौजिया सतीश कनौजिया, विजय प्रताप सिंह इत्यादि लोग उपस्थित रहें।