Bansgaon Sandesh
Login
Vinod Gupta
Gorakhpurलगभग २ घंटे पहले

सुर्यास्त से ही नया सबेरा जन्म लेता है- आचार्य विनोद जानीपुर गोरखपुर।

सुर्यास्त से ही नया सबेरा जन्म लेता है- आचार्य विनोद जानीपुर गोरखपुर। ग्राम सभा तीयर बरईठ चौराहे पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छठे दिवस कथा व्यास आचार्य श्री विनोद जी महाराज ने कहा ।। पतझड़ होता है, तभी वृक्षों पर हरी कोपलें फूटती हैं और सूर्यास्त होता है तभी अंधकार के बाद एक नया सवेरा जन्म लेता है। पतझड़ होता है ताकि हरियाली छा सके एवं अंधकार होता है ताकि अरूणोदय की लालिमा का आनंद हम सबको प्राप्त हो सके। जीवन भी कुछ इस तरह का ही है। यहाँ विसर्जन के साथ ही सृजन जुड़ा हुआ है। हमारे दुःखों का एक प्रमुख कारण यह भी है कि हम जीवन को केवल एक दृष्टि से देखते हैं। हमें अपने जीवन को सूर्यास्त की दृष्टि से नहीं, सूर्योदय की दृष्टि से देखना चाहिए। परमात्मा से कभी कोई शिकायत मत करो, क्योंकि वो हमसे बेहतर इस बात को जानते हैं कि हमारे लिए क्या अच्छा हो सकता है। उस ईश्वर ने आपकी झोली खाली की है तो चिंता मत करना, क्योंकि शायद वह पहले से कुछ बेहतर उसमे डालना चाहते हों, सुख और दुःख जीवन रुपी "रथ" के दो पहिये हैं। सुख के बिना दुःख का कोई अस्तित्व नहीं और दुःख के बिना सुख का भी कोई महत्व नहीं। इसलिए दुख आने पर धैर्य के साथ प्रभुनाम का आश्रय लेकर इस विश्वास के साथ प्रतीक्षा करो, कि प्रकाश भी नहीं टिका तो भला अंधकार कैसे टिक सकता है.? इस संसार में किसी की नजर में आप अच्छे हैं और किसी की नजर में आप बुरे हैं, वास्तविकता ये है कि जिसकी जैसी जितनी जरूरत है, उनके लिए आप वैसे ही हैं, भूख ही निर्धारित करती है खाने का स्वाद। स्वस्थ्य शरीर में ही स्वस्थ्य मन का निवास होता है। सब कुछ संभव है अगर हमारे पास सही लोग हों। एकांत में शिक्षा होती है, भीड़ में परीक्षा होती है। सार्वजनिक रूप से की गई आलोचना अपमान में बदल जाती है और एकांत में बताने पर सलाह बन जाती है। सम्बन्ध और जल एक समान होते है, न कोई रंग, न कोई रूप पर फिर भी जीवन के अस्तित्व के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। जिसे घुटने मोड़कर, सोना आ गया, उनके जीवन में कोई भी, चादर छोटी नहीं पड़ती ।इंसान जिंदगी बनाने के चक्कर में जीना ही भूल गया है। किसी चीज़ को किसी ख़ास अवसर के लिए बचाकर नहीं रखना है क्योंकि हमारी ज़िंदगी का हर दिन एक ख़ास दिन है। दूसरों के व्यवहार को बदलने के बजाय अपने विचारों को बदलना जरूरी है। क्योंकि दूसरों के व्यवहार को बदलना हमारे हाथ में नहीं है लेकिन अपने विचारों को बदलना हमारे हाथ है, और ये भी संभव है कि हमारे विचारों के बदलते ही दूसरों का व्यवहार स्वतः ही बदल जाए, "संसार में अपना स्थान बनाने के लिये त्याग बहुत आवश्यक है .जैसे. एक फूल को सबका प्रिय बनने के लिए खुशबू तो लुटानी ही पड़ती है! विश्वास ही वो आधार है, जो जीवन को सार्थक बनाता है। जब हम विश्वास रखते हैं, तब हम अपने रिश्तों, प्रेम और प्रार्थनाओं में भी सच्चाई और पवित्रता पा सकते हैं। बिना विश्वास के कुछ भी स्थिर और सच्चा नहीं होता ।।

0 likes
0 comments3 shares