सर्वाइकल कैंसर को लेकर जागरूकता अभियान, स्क्रीनिंग व टीकाकरण पर दिया गया जोर

गोरखपुर। महिलाओं में तेजी से बढ़ रही सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर में विशेष जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम, समय पर स्क्रीनिंग और एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण के महत्व के बारे में सही और वैज्ञानिक जानकारी प्रदान करना रहा। यह जागरूकता अभियान एम्स गोरखपुर के गायनी विभाग की हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. शिखा सेठी के नेतृत्व में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रीति प्रियदर्शिनी और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रीति बाला सिंह सहित विभाग के कई जूनियर डॉक्टर, मेडिकल स्टाफ और प्रशिक्षु छात्र-छात्राएं सक्रिय रूप से शामिल रहे। अभियान के दौरान पोस्टर, चार्ट और चित्रों के माध्यम से महिलाओं को सरल और सहज भाषा में सर्वाइकल कैंसर से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। जागरूकता पोस्टरों के माध्यम से बताया गया कि सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से एचपीवी संक्रमण के कारण होता है, लेकिन यह पूरी तरह से रोके जाने योग्य बीमारी है। नियमित पैप स्मीयर टेस्ट, एचपीवी टेस्ट और समय पर वैक्सीनेशन से इस कैंसर के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि 21 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को नियमित अंतराल पर स्क्रीनिंग करानी चाहिए, जबकि किशोरियों और युवतियों के लिए एचपीवी वैक्सीनेशन अत्यंत प्रभावी और सुरक्षित उपाय है। इस अवसर पर डॉ. शिखा सेठी ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते, इसलिए समय पर जांच ही सबसे बड़ा बचाव है। उन्होंने महिलाओं से अपील की कि वे किसी भी तरह की झिझक छोड़कर नियमित जांच कराएं और अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। वहीं डॉ. प्रीति प्रियदर्शिनी और डॉ. प्रीति बाला सिंह ने एचपीवी वैक्सीनेशन की सुरक्षा, प्रभावशीलता और इसके दीर्घकालिक लाभों पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम में डॉ. आराधना, डॉ. विभा, डॉ. प्रियंका सिंह सिसोदिया, डॉ. सौम्य, डॉ. सुभागी, डॉ. जागृति और डॉ. मेघा की भी सक्रिय सहभागिता रही। साथ ही जनरल देखभाल में नर्सिंग ऑफिसर अंकिता, मंजू, नेगी और रितु की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। एम्स गोरखपुर द्वारा आयोजित यह जागरूकता अभियान महिलाओं के स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल है। इस तरह के कार्यक्रम न केवल सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम में सहायक सिद्ध होते हैं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और सकारात्मक सोच को भी मजबूत करते हैं।