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Lucknowलगभग १ घंटा पहले

गोरखपुर में IAS की तैयारी के साथ 3 बहनें चला रहीं चाय

गोरखपुर में IAS की तैयारी के साथ 3 बहनें चला रहीं चाय

गोरखपुर में IAS की तैयारी के साथ 3 बहनें चला रहीं चाय की दुकान, नाम रखा- बिलीवर बिस्ट्रो *गोरखपुर।* हौसलों की एक मिसाल गोरखपुर में देखने को मिली है। यहां IAS की तैयारी कर रहीं तीन सगी बहनें DDU गेट के सामने चाय का स्टॉल चला रही हैं। उन्होंने अपने स्टॉल का नाम रखा है - बिलीवर बिस्ट्रो, यानी आस्थावानों का कैफे। तीन बहनों - वर्तिका (22), वंदिता (21) और अवंतिका (19) की कहानी संघर्ष की है। मूल रूप से महराजगंज की रहने वाली ये तीनों बहनें परिवार के साथ गोरखपुर के बरगदवां में किराए के मकान में रहती हैं। पिता रामसकल उपाध्याय पहले रिलायंस लाइफ इंश्योरेंस में ब्रांच मैनेजर थे। परिवार की स्थिति ठीक थी, लेकिन 2017 में पिता को पैरालाइज हो गया और नौकरी चली गई। इलाज में 3 से 4 लाख रुपये खर्च हो गए, बचत खत्म हो गई। मां माधुरी हाउसवाइफ हैं और भाई शिवम (26) अब टेलीकॉलर का काम करते हैं। पिता की बीमारी और आर्थिक तंगी के बाद तीनों बहनों ने 4 साल पहले चाय की दुकान का सोचा, लेकिन रिश्तेदारों के डर से मां ने मना कर दिया। 3 महीने पहले तीनों ने फिर हिम्मत जुटाई और 8 हजार रुपये जमा कर DDU गेट के सामने स्टॉल शुरू कर दिया। *दिन में दुकान, रात में पढ़ाई* तीनों बहनें सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक स्टॉल लगाती हैं। बिक्री बढ़ी तो चाय के साथ मैगी भी जोड़ दी। दुकान पर वंदिता और सबसे छोटी अवंतिका रहती हैं, जबकि बड़ी बहन वर्तिका पढ़ाई पर फोकस करती है। वर्तिका BSc कर चुकी हैं और सेल्फ स्टडी से UPSC की तैयारी कर रही हैं। वह सुबह 4 बजे उठकर नोट्स बनाती हैं, बहनों को दुकान भेजकर पिता को दवा देती हैं और दिन में 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती हैं। वंदिता BSc सेकंड ईयर में हैं और IPS बनना चाहती हैं, जबकि अवंतिका DDU से BSc फर्स्ट ईयर में हैं और IAS बनना चाहती हैं। दोनों दिन में दुकान संभालती हैं और रात 12 से 2 बजे तक यूट्यूब से पढ़ाई करती हैं। वर्तिका अपनी दोनों छोटी बहनों को भी गाइड करती हैं। मां माधुरी कहती हैं, "बुरे वक्त में मेरी बेटियां ही मेरी हिम्मत बनीं। पहले मैं मना करती थी, अब खुश हूं कि वो अपना काम कर रही हैं।" पिता रामसकल को भी बेटियों पर गर्व है।

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