*यूपी पुलिस में 'विद्रोह': सिपाही ने अफसरों को बताया 'काले अंग्रेज', CM

*यूपी पुलिस में 'विद्रोह': सिपाही ने अफसरों को बताया 'काले अंग्रेज', CM योगी से गुहार— "साहब! जब आरोपी ही जज बनेंगे, तो न्याय कैसे मिलेगा? लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस महकमे के भीतर मचे घमासान ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। लखनऊ कमिश्नरेट की रिजर्व पुलिस लाइंस में तैनात कॉन्स्टेबल सुनील कुमार शुक्ला ने लगातार दूसरे दिन वीडियो जारी कर विभाग के आला अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सिपाही ने सीधे तौर पर आईपीएस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए इस पूरी व्यवस्था को 'काले अंग्रेजों की जमींदारी' करार दिया है। "आरोपी ही करेंगे जांच, तो कैसा न्याय?" गुरुवार को फेसबुक पर पहला वीडियो पोस्ट करने के बाद, सुनील शुक्ला ने दूसरे वीडियो में सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित किया। सिपाही ने तर्क दिया: "मुख्यमंत्री जी, जिन अधिकारियों (काले अंग्रेजों) पर मैंने भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं, विभाग ने उन्हीं को जांच सौंप दी है। एक सामान्य बुद्धि का व्यक्ति भी समझ सकता है कि जहाँ आरोपी ही जांचकर्ता हों, वहाँ निष्पक्षता की उम्मीद नहीं की जा सकती।" भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: 'ड्यूटी के नाम पर वसूली' कॉन्स्टेबल ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर कड़े प्रहार करते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं: महीने का 'टैक्स': आरोप है कि रिजर्व पुलिस लाइन में ड्यूटी लगाने के नाम पर सिपाहियों और दीवानों से हर महीने लगभग 2,000 रुपये की अवैध वसूली की जाती है। पदानुक्रमित भ्रष्टाचार: सुनील का दावा है कि यह पैसा गार्ड कमांडर के जरिए इकट्ठा होकर गणना प्रभारी, आरआई (RI) और फिर ऊपर के बड़े अधिकारियों तक पहुँचता है। सिस्टम पर चोट: सिपाही ने विभाग के संचालन की तुलना अंग्रेजों के जमाने की 'जमींदारी व्यवस्था' से की है। विभाग की कार्रवाई: 20 दिन की छुट्टी पर भेजा वीडियो वायरल होने और महकमे की किरकिरी होने के बाद, बताया जा रहा है कि कॉन्स्टेबल सुनील कुमार शुक्ला को 20 दिन की अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया गया है। हालांकि, सिपाही का कहना है कि उसे विभागीय जांच पर भरोसा नहीं है और वह केवल मुख्यमंत्री से ही न्याय की उम्मीद रखता है। मुख्य मांग: 'स्वतंत्र एजेंसी से हो जांच' सुनील शुक्ला ने मुख्यमंत्री से अपील की है कि इस पूरे 'वसूली सिंडिकेट' की जांच किसी स्वतंत्र या निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। उन्होंने कहा, "आप पुलिस परिवार के मुखिया हैं, केवल आप ही हमें इन काले अंग्रेजों से बचा सकते हैं।" निष्कर्ष: एक तरफ जहाँ यूपी सरकार पुलिस को हाईटेक और पारदर्शी बनाने का दावा कर रही है, वहीं एक सिपाही द्वारा लगाए गए ये संगीन आरोप विभाग की आंतरिक कार्यशैली पर बड़े सवालिया निशान खड़े करते हैं। अब देखना यह है कि शासन इस 'बगावती सुर' पर क्या कड़ा कदम उठाता है।