132 केवी डाला सबस्टेशन में लाखों की चोरी और कथित भ्रष्टाचार के आरोप

132 केवी डाला सबस्टेशन में लाखों की चोरी और कथित भ्रष्टाचार के आरोप स्टोर से तांबा-पीतल गायब होने का दावा, संदिग्ध वाहन और आउटसोर्सिंग टेंडर जांच के घेरे में; JE पर गंभीर आरोप डाला/सोनभद्र। डाला स्थित 132 केवी विद्युत पारेषण सबस्टेशन में सरकारी स्टोर से लाखों रुपये मूल्य के तांबे, पीतल एवं अन्य विभागीय सामान के कथित तौर पर गायब होने का मामला सामने आया है। घटना को लेकर सबस्टेशन पर तैनात अवर अभियंता (JE) लव कुमार सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, 5 सितंबर 2026 को सबस्टेशन के स्टोर नंबर-1 और स्टोर नंबर-2 से बड़ी मात्रा में सरकारी सामग्री गायब होने का आरोप है। स्थानीय स्तर पर गायब सामान की अनुमानित कीमत 10 से 12 लाख रुपये बताई जा रही है। मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया जा रहा है कि स्टोर अथवा परिसर में किसी प्रकार की तोड़फोड़ के निशान नहीं मिले। ऐसे में बिना ताला या दीवार तोड़े सामग्री बाहर निकलने के आरोप ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। संदिग्ध वाहन को लेकर सवाल मौके पर तैनात सुरक्षा गार्डों के हवाले से बताया गया कि शनिवार शाम करीब 5 बजे Mahindra SUV (UP64AU1342) स्टोर के पास पहुंची थी। आरोप है कि मुख्य गेट पर वाहन की जांच को लेकर सुरक्षाकर्मियों ने रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक द्वारा JE से फोन पर बात कराने के बाद वाहन को बिना जांच बाहर जाने दिया गया। यदि यह तथ्य सही है तो वाहन की गेट एंट्री, CCTV फुटेज, चालक के बयान और उस समय की ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मियों के बयान की जांच से मामले की महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आ सकती हैं। मीडिया के पहुंचने पर बढ़ा विवाद मामले की जानकारी लेने पहुंचे पत्रकारों के सामने भी स्थिति को लेकर सवाल खड़े हुए। आरोप है कि JE लव कुमार सिंह मीडिया के सवालों का जवाब देने के बजाय मौके से चले गए। पत्रकारों को केवल एक स्टोर दिखाए जाने, जबकि दूसरे स्टोर को नहीं खोले जाने को लेकर भी संदेह जताया गया है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना अभी बाकी है। निष्पक्ष जांच के लिए विभागीय अधिकारियों का बयान भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर भी सवाल सबस्टेशन में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारियों की तैनाती को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि करीब 8 कर्मचारियों की स्वीकृत व्यवस्था के बावजूद पिछले दो महीनों से मौके पर केवल एक कर्मचारी ही ड्यूटी करता दिखाई दे रहा है। शेष कर्मचारियों के नाम पर भुगतान किए जाने और JE तथा ठेकेदार की कथित मिलीभगत से सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए उपस्थिति पंजिका, ड्यूटी रोस्टर, भुगतान विवरण, ठेकेदार के बिल और CCTV फुटेज की जांच आवश्यक होगी। वर्ष 2017 से एक ही जनपद में तैनाती का आरोप JE लव कुमार सिंह की वर्ष 2017 से लगातार सोनभद्र में तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से एक ही जनपद में तैनाती के कारण विभागीय कार्यप्रणाली में पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, स्थानांतरण नीति के तहत उनकी वर्तमान तैनाती नियमों के अनुरूप है या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित विभागीय अभिलेखों और लागू शासनादेशों की जांच के बाद ही किया जा सकता है। निष्पक्ष जांच की मांग मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और मीडियाकर्मियों ने ऊर्जा विभाग के उच्चाधिकारियों से 132 केवी डाला सबस्टेशन के दोनों स्टोरों का तत्काल भौतिक सत्यापन, स्टॉक रजिस्टर और निर्गमन अभिलेखों की जांच तथा संदिग्ध वाहन की गेट एंट्री और CCTV फुटेज की जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही आउटसोर्सिंग टेंडर, उपस्थिति पंजिका, ड्यूटी रोस्टर और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच कर वास्तविक कर्मचारियों की तैनाती का सत्यापन कराने की मांग की गई है।