Bansgaon Sandesh
Login
Rahul kumar singh
Sultanpurलगभग १ घंटा पहले

बुरा न मानो होली है सुल्तानपुर में रिटायर कर्मचारियों की ‘बल्ले-बल्ले’, विभागों

बुरा न मानो होली है सुल्तानपुर में रिटायर कर्मचारियों की ‘बल्ले-बल्ले’, विभागों में अब भी दे रहे सेवा* *शासनादेश पर उठे गंभीर* *सवाल* सुल्तानपुर। होली के रंगों के बीच जनपद सुल्तानपुर के सरकारी दफ्तरों से प्रशासनिक व्यवस्था की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आ रही है। आरोप है कि सेवानिवृत्त (रिटायर) कर्मचारी अब भी विभिन्न विभागों में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जिससे शासन के आदेशों के पालन और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार कुछ रिटायर कर्मचारियों को अयोध्या मंडल के कमिश्नर कार्यालय से स्टेनो के रूप में जोड़कर जनपद में निरीक्षण के लिए भेजा जाता है। बताया जाता है कि ये कर्मचारी ‘सेटिंग-गेटिंग’ में माहिर माने जाते हैं और अपने करीबियों के कार्य निकलवाने के साथ-साथ स्वयं भी प्रभाव बनाए रखते हैं। चर्चा यह भी है कि टेंडर प्रक्रिया समेत कई प्रशासनिक मामलों में इनके हस्ताक्षर तक होने की बात सामने आ रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जनपद के विकास भवन सहित कई विभागों में रिटायर कर्मचारियों की सक्रिय मौजूदगी बताई जा रही है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय, वित्त एवं लेखा अधिकारी कार्यालय, स्वास्थ्य विभाग तथा ग्राम विकास विभाग के अलावा विकास भवन के तृतीय तल पर भी सेवानिवृत्त कर्मचारी नियमित रूप से बैठकर कार्य करते देखे जा रहे हैं। वहीं जयसिंहपुर विकासखंड में भी एक रिटायर कर्मचारी के अकाउंटेंट के रूप में कार्य करने की चर्चा है। आरोप है कि मौजूदा अकाउंटेंट को कार्य न आने का हवाला देकर रिटायर कर्मचारी से काम कराया जा रहा है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि जब नियमित कर्मचारी मौजूद हैं, तो सेवानिवृत्त कर्मियों की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। स्थानीय कर्मचारियों और लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि कई रिटायर कर्मचारियों का अपनी कुर्सी से मोह अभी तक समाप्त नहीं हुआ है। वहीं सूत्रों का दावा है कि कुछ मामलों में आर्थिक लाभ की संभावना भी इस व्यवस्था को जारी रखने का कारण बन रही है। गौरतलब है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके हैं कि कोई भी सेवानिवृत्त कर्मचारी सरकारी कार्यालयों में बैठकर नियमित कार्य नहीं करेगा। इसके बावजूद यदि ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, तो इसे शासनादेश की अनदेखी माना जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन अधिकारियों पर शासनादेश लागू कराने और कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, यदि वही आदेशों की अनदेखी होने दें, तो व्यवस्था कैसे सुचारु रूप से चलेगी। आरोप यह भी है कि कुछ रिटायर कर्मचारी उच्च अधिकारियों पर प्रभाव दिखाते हुए कार्यालयों में अपना अधिकार जताते नजर आते हैं। अब निगाहें जिला प्रशासन और मंडलीय अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि इस मामले की जांच होती है या फिर होली के रंगों के साथ यह मुद्दा भी ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

0 likes
0 comments0 shares