*मासूम अर्पित के लिए फरिश्ता बना जिला प्रशासन, अब पूरी जिंदगी की

*मासूम अर्पित के लिए फरिश्ता बना जिला प्रशासन, अब पूरी जिंदगी की जिम्मेदारी उठाएगा प्रशासन* गोण्डा बांसगांव संदेश मां की मौत के बाद अपनों के बीच बेसहारा हुए सात वर्षीय मासूम अर्पित की दर्दभरी कहानी ने पूरे जिले को भावुक कर दिया। जिन रिश्तेदारों और करीबियों से उसे सहारे की उम्मीद थी, उन्होंने ही उससे मुंह मोड़ लिया। लेकिन कहते हैं ना कि जब इंसान साथ छोड़ देता है, तब भगवान किसी न किसी रूप में मदद के लिए आगे आते हैं। इस बार मासूम अर्पित के लिए जिला प्रशासन ही उसका सबसे बड़ा सहारा बनकर सामने आया। सोशल मीडिया पर खबर वायरल होते ही जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने मामले को गंभीरता से लिया और तुरंत अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशासन ने बिना देर किए अर्पित को सुरक्षित बाल शिशु गृह भेजने की व्यवस्था कराई। इतना ही नहीं, उसकी पढ़ाई, भोजन, कपड़े, रहने और बेहतर भविष्य की पूरी जिम्मेदारी उठाने का भरोसा भी दिया गया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी संतोष कुमार सोनी ने बताया कि चाइल्ड हेल्पलाइन और बाल कल्याण समिति की मदद से अर्पित को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है, जहां अब उसकी देखभाल प्रशासन की निगरानी में की जाएगी। इस मानवीय पहल की पूरे जिले में जमकर सराहना हो रही है। लोग जिला प्रशासन को गरीब और बेसहारा बच्चों के लिए उम्मीद की नई किरण बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी लोग जिलाधिकारी और प्रशासनिक टीम की संवेदनशीलता की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। एक तरफ जहां रिश्तों ने साथ छोड़ दिया, वहीं प्रशासन ने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए यह साबित कर दिया कि अभी भी समाज में संवेदनाएं जिंदा हैं।