*टोंस नदी पर ‘खनन सिंडिकेट’ का कब्जा! करछना में बेखौफ खेल, सिस्टम

*टोंस नदी पर ‘खनन सिंडिकेट’ का कब्जा! करछना में बेखौफ खेल, सिस्टम पर सीधे सवाल* *धरवाराघाट से साहपुर तक नामजद चेहरे बेनकाब—मिलीभगत, वसूली और धमकियों से दहशत में गांव* रिपोर्टर आदित्य कुमार प्रयागराज। करछना तहसील में अवैध खनन अब छुपा हुआ अपराध नहीं, बल्कि खुला संगठित कारोबार बन चुका है। टोंस नदी के धरवाराघाट पर बिना किसी वैध पट्टे के दिन- दहाड़े जेसीबी और ट्रैक्टरों से बालू निकासी की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह सब कुछ प्रशासनिक तंत्र की आंखों के सामने हो रहा है, फिर भी कार्रवाई शून्य है—जिससे मिलीभगत की बू साफ महसूस होती है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह कोई बिखरा हुआ मामला नहीं,बल्कि एक संगठित “खनन सिंडिकेट” है जो धरवाराघाट से लेकर धरवारा साहपुर, सुलमई, इसैटा और झरियही तक अपनी पकड़ बनाए हुए है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में बृजेश सिंह उर्फ चंदन, विजय प्रताप सिंह उर्फ मोहन सिंह, संजय निषाद, राम सिंह, जैसे नाम खुलकर सामने आ रहे हैं, जो कथित तौर पर खुलेआम खनन कर रहे हैं और प्रभाव के दम पर सिस्टम को चुनौती दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी के किनारों का तेजी से कटाव हो रहा है, जलस्तर गिर रहा है और पर्यावरणीय संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। लेकिन इन गंभीर खतरों के बावजूद जिम्मेदार विभागों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। आरोप यहां तक हैं कि हर महीने मोटी रकम “सेटिंग” के नाम पर पहुंचाई जाती है, जिसके चलते खनन विभाग और स्थानीय पुलिस कार्रवाई से बचती नजर आती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जो भी इस खेल के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता है, उसे डराया- धमकाया जाता है। ग्रामीणों ने साफ कहा कि शिकायत करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है और जान से मारने तक की धमकियां दी जाती हैं। इससे पूरे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। अब सवाल यह है कि क्या करछना में कानून का राज है या फिर खनन माफियाओं का? क्या प्रशासन इस पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कस पाएगा या फिर यह अवैध खेल यूं ही चलता रहेगा? ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कराई जाए, नामजद आरोपियों की भूमिका की पड़ताल हो और अवैध खनन के इस जाल को जड़ से खत्म किया जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस चुनौती को गंभीरता से लेता है या फिर टोंस नदी का सीना यूं ही छलनी होता रहेगा।