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Ram Prakash Kasaudhan
Gorakhpur४४ मिनट पहले

*जब बड़े अस्पतालों ने छोड़ी उम्मीद, तब शुभम हॉस्पिटल बना सहारा* सिकरीगंज।

*जब बड़े अस्पतालों ने छोड़ी उम्मीद, तब शुभम हॉस्पिटल बना सहारा* सिकरीगंज।

*जब बड़े अस्पतालों ने छोड़ी उम्मीद, तब शुभम हॉस्पिटल बना सहारा* सिकरीगंज। सिद्धार्थनगर निवासी 65 वर्षीय घनश्याम त्रिपाठी की अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें इलाज के लिए देवरिया स्थित मंगलम हॉस्पिटल में भर्ती कराया। परिजनों के अनुसार मरीज की हालत बेहद गंभीर थी। डॉक्टरों ने कई गंभीर बीमारियों का हवाला देते हुए स्थिति नाजुक बताई और बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भी मरीज की हालत में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ, बल्कि स्थिति और गंभीर होती चली गई। इसी दौरान परिजनों के परिचित हिमांशु शुक्ला ने उन्हें सिकरीगंज स्थित शुभम हॉस्पिटल में इलाज कराने की सलाह दी। परिजन जब घनश्याम त्रिपाठी को शुभम हॉस्पिटल लेकर पहुंचे तो मरीज की गंभीर स्थिति देखकर डॉक्टर भी एक बार चिंतन में पड़ गए। अस्पताल के संचालक डॉ. जय हिंद मौर्य ने पूर्व सीएमओ गोरखपुर डॉ महेंद्र प्रताप सिंह से बात की और परिजनों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि पूरी मेहनत और समर्पण के साथ इलाज किया जाएगा। इसके बाद मरीज को तत्काल भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। लगातार पांच दिनों तक चले इलाज और देखरेख के बाद घनश्याम त्रिपाठी की तबीयत में तेजी से सुधार होने लगा। जो मरीज गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचा था, वह अब अपने पैरों पर चलने लगा और खुद को काफी राहत महसूस करने लगा। मरीज के स्वस्थ होने पर परिजनों के चेहरे पर खुशी लौट आई। परिजनों ने बताया कि जहां अन्य अस्पतालों ने उम्मीद छोड़ दी थी, वहीं शुभम हॉस्पिटल सिकरीगंज ने अपनी बेहतर चिकित्सा व्यवस्था और डॉक्टरों की मेहनत से मरीज को नई जिंदगी देने का कार्य किया। अस्पताल से छुट्टी के दौरान परिजनों ने डॉ. जय हिंद मौर्य एवं पूर्व सीएमओ गोरखपुर डॉ. महेन्द्र प्रताप सिंह का आभार व्यक्त किया।

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