18 लाख की ठगी के बाद भी अस्पताल का लाइसेंस निरस्त! नकली OSD, “गोल्डन बाबा” और स्वास्थ्य प्रशासन पर उठे सवाल

सिकरीगंज (गोरखपुर)।राम प्रकाश कशौधन की रिपोर्ट। सिकरीगंज स्थित राजेश हाईटेक हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद 9 मरीजों की आंखों की रोशनी जाने की घटना से पूरा क्षेत्र पहले ही स्तब्ध था। इस मामले में अस्पताल का लाइसेंस निरस्त किए जाने के बाद अब एक नया और सनसनीखेज आरोप सामने आया है। अस्पताल संचालक राजेश राय ने दावा किया है कि जांच के नाम पर उनसे करीब 18 लाख रुपये की ठगी की गई, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल पर कार्रवाई कर दी गई। राजेश राय के अनुसार जांच प्रक्रिया के दौरान एक मोबाइल नंबर से उन्हें फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को मुख्यमंत्री का ओएसडी बताया। उसने मामले को “हाईलाइटेड” बताते हुए कार्रवाई से बचाने का भरोसा दिया और लगातार फोन पर संपर्क बनाए रखा। बातचीत के दौरान अलग-अलग लोग ओएसडी, पीए और सीएमओ बनकर उनसे बात करते रहे और बड़े अधिकारियों से मुलाकात कराने का दावा करते रहे। संचालक का आरोप है कि कुछ दिनों बाद दो लोग गोरखपुर पहुंचे, जिनमें एक व्यक्ति ने खुद को “गोल्डन बाबा” बताया। उसने कहा कि वह दो दिन पहले सीएमओ कार्यालय में अधिकारियों से मिल चुका है और मामला 15 लाख रुपये में निपट जाएगा। साथ ही भरोसा दिलाया गया कि अस्पताल के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होगी। राजेश राय का कहना है कि 28 फरवरी 2026 को दोपहर करीब 12 बजे वह 15 लाख रुपये एक झोले में लेकर सीएमओ कार्यालय स्थित हनुमान मंदिर पहुंचे। वहां एक व्यक्ति ने उनसे रुपयों से भरा झोला ले लिया। इससे पहले कथित ओएसडी ने नोटों की गड्डियों की फोटो व्हाट्सएप पर मंगवाकर डिलीवरी की पुष्टि भी कराई थी। संचालक का आरोप है कि कुल मिलाकर करीब 18 लाख रुपये अलग-अलग लोगों को दिए गए। लेकिन उसी दिन शाम को सीएमओ गोरखपुर की ओर से राजेश हाईटेक अस्पताल का पंजीकरण निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब मामले ने नया मोड़ ले लिया है। अस्पताल संचालक के आरोपों के बाद नकली ओएसडी बनकर ठगी, कथित बिचौलियों की भूमिका और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि जल्द ही इस पूरे प्रकरण को लेकर विस्तृत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है और निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है।