*थानों में तबादले की आंधी* पुलिस ऑफिस में स्थायी सरकार कायम सुल्तानपुर
थानों में तबादले की आंधी पुलिस ऑफिस में स्थायी सरकार कायम सुल्तानपुर एक तरफ कप्तान साहब जिले के थानों की ओवरहालिंग में पूरी ताकत झोंके हुए हैं। कहीं इंस्पेक्टर बदले जा रहे हैं, कहीं चौकी प्रभारियों की कुर्सियां हिल रही हैं तो कहीं सिपाहियों की लाइन हाजिरी लग रही है। ऐसा माहौल बनाया जा रहा है मानो जिले की पुलिस व्यवस्था में क्रांति आ गई हो। लेकिन सवाल वही पुराना है क्या सिर्फ थानों में ही सुधार की जरूरत है। पुलिस ऑफिस की गलियों में आज भी कुछ ऐसे मठाधीश जमे हुए हैं, जिनकी कुर्सी पर वक्त का असर नहीं पड़ता। कप्तान बदल गए, सरकारें बदल गईं, लेकिन इनका मैनेजमेंट सिस्टम जस का तस कायम है। विभाग में चर्चा है कि कुछ बाबू, दीवान और सिपाही वर्षों से एक ही जगह पर बैटिंग कर रहे हैं और हर नए अधिकारी के साथ ऐसे घुलमिल जाते हैं मानो वही विभाग चला रहे हों। CO City ऑफिस में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। अभिषेक त्यागी, राकेश कुमार और सुगंध जैसे नाम विभागीय गलियारों में लंबे समय से चर्चा का विषय बने हुए हैं। पुलिस महकमे में कानाफूसी है कि ये लोग मैनेजमेंट किंग माने जाते हैं जिनकी पकड़ ऊपर तक बताई जाती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं है लेकिन सवाल जरूर खड़े हो रहे हैं कि आखिर वर्षों से एक ही जगह जमे लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती। 😄 थानों में तो हर कुछ महीनों में सर्जिकल स्ट्राइक हो जाती है लेकिन पुलिस ऑफिस के भीतर बैठे स्थायी स्तंभों पर प्रशासन की नजर शायद कभी पड़ती ही नहीं। क्या ओवरहालिंग सिर्फ दिखावे के लिए है। क्या नियम सिर्फ फील्ड में काम करने वालों के लिए हैं और क्या पुलिस ऑफिस में बैठे कुछ चेहरे विभाग से भी ज्यादा स्थायी हो चुके हैं। अगर वास्तव में पारदर्शिता लानी है तो कार्रवाई का डंडा सिर्फ थानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वरना चिराग तले अंधेरा वाली कहावत यूं ही पुलिस विभाग की पहचान बनी रहेगी।