अहंकार पतन का कारण होता है लवकुश जी महाराज

चौरी चौरा गोरखपुर। अहंकार पतन का कारण होता है उक्त बातें हेमधापुर गांव में हो रहे।श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के पाँचवे दिवस पुज्य लवकुश जी महाराज ने कहीं उन्होंने कथा प्रसंग में कहा कि किसी को कोई कार्य कर के कभी भी अहंकार नही करना चाहिए । दैत्यराज बलि को दान करने का बहुत ही अहंकार हो गया था जबकि अहंकार ही भगवान का भोजन है । भगवान का कार्य ही वही है। रङ्कं करोति राजानं राजानं रङ्कमेव च धनिनं निर्धनं चैव निर्धनं धनिनं विधिः भगवान ने अदिति माता के यहा बामन अवतार लेकर और बलि के यहां जाकर तीन पग भुमि की दान की याचना किया जिसको बलि ने दान का संकल्प किया जिसमे भगवान ने एक पग मे आकाश दुसरे पग में भुमि तिसरे पग में राजा बलि को पाताल भेजकर वहां का राजा बनाया ।भविष्य में इन्द्र का पद देने का वरदान दिया। वैदिक मंत्रोच्चार आचार्य संतोष मिश्र व पं आकाश मिश्र अशोक तिवारी मुख्य यजमान श्री अवध बिहारी सिंह और उनकी धर्मपत्नी कमलावती देवी, कृष्ण मोहन सिंह,गौरीशंकर, गुड़ीया देवी,पूनम सिंह राजेन्द्र सिंह,राजदेव सिंह,वकिल सिंह शिवदत्त गोंड, मेवालाल श्रीकिशुन मल्ल, ब्रह्मदेव दीनानाथ सिंह लौहर कन्नौजिया सहित सैकङों श्रोताओ ने कथा का रसपान किया।