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Pradhan Pravasi
Gorakhpurलगभग १ घंटा पहले

गीडा में शराब के खेल पर बड़ा सवाल: सुबह होते ही ओवररेटिंग

गीडा में शराब के खेल पर बड़ा सवाल: सुबह होते ही ओवररेटिंग का आरोप, स्टिंग कैमरे में सेल्समैन के चौंकाने वाले दावे! 55 रुपये की बोतल 65–70 रुपये में बेचने का आरोप, कैमरे पर पुलिसकर्मियों को पैसे देने की बात—आबकारी और पुलिस विभाग से जांच की मांग सहजनवा गोरखपुर/गीडा। मुख्यमंत्री के गृह जनपद में शराब बिक्री की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गीडा थाना क्षेत्र के पिपरौली बाजार में सुबह होते ही शराब की दुकानों पर कथित तौर पर ओवररेटिंग और नियमों से इतर बिक्री किए जाने के आरोप सामने आए हैं। मीडिया टीम के स्टिंग ऑपरेशन के दौरान शराब दुकान के सेल्समैन द्वारा किए गए कथित दावों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। स्टिंग के दौरान सेल्समैन से जब सुबह दुकान खोलने और निर्धारित कीमत से अधिक पर शराब बेचने को लेकर सवाल किया गया, तो उसके द्वारा कथित तौर पर आबकारी विभाग और पुलिसकर्मियों को पैसे दिए जाने की बात कही गई। बातचीत में विजय यादव नाम के सिपाही को पैसे देने का दावा भी सामने आया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए यह जांच का विषय है कि वास्तव में किसी पुलिसकर्मी या आबकारी कर्मचारी की इसमें कोई भूमिका है या नहीं। 55 रुपये की बोतल 65 से 70 रुपये में? स्थानीय लोगों और सामने आए वीडियो से जुड़े आरोपों के मुताबिक, निर्धारित कीमत से अधिक रकम लेकर शराब बेचने की बात सामने आई है। दावा है कि 55 रुपये कीमत वाली शराब 65 से 70 रुपये तक में बेचे जाने की शिकायतें मिल रही हैं। अगर जांच में ओवररेटिंग की पुष्टि होती है तो यह आबकारी नियमों के पालन और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करेगा। बोतल खोलकर बिक्री और बाइक से सप्लाई का भी दावा मामला केवल ओवररेटिंग तक सीमित नहीं बताया जा रहा। सामने आए वीडियो में शराब की बोतल खोलकर अलग-अलग लोगों को शराब देने तथा बाइक के जरिए शराब पहुंचाने/बेचने जैसी गतिविधियों के दावे भी किए जा रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि यदि यह गतिविधियां वास्तव में हो रही थीं तो संबंधित जिम्मेदार विभागों की निगरानी व्यवस्था कहां थी? बर्खास्त सिपाही के नाम ने बढ़ाई गुत्थी मामले में सबसे गंभीर सवाल उस दावे को लेकर है जिसमें एक बर्खास्त सिपाही के नाम से कथित वसूली की बात सामने आने का दावा किया जा रहा है। यदि संबंधित व्यक्ति वास्तव में बर्खास्त है, तो उसके नाम पर कथित वसूली कौन कर रहा है और वह पुलिस व्यवस्था के नाम का इस्तेमाल कैसे कर रहा है—यह जांच का अहम बिंदु है। वहीं, गीडा थाने में कार्यरत विजय यादव नामक सिपाही को भी पैसे देने की बात सामने आने का दावा किया गया है। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। आबकारी विभाग की चुप्पी पर सवाल एक सप्ताह से अधिक समय से शराब बिक्री को लेकर शिकायतें और वीडियो सामने आने के बावजूद यदि प्रभावी कार्रवाई की तस्वीर स्पष्ट नहीं है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था आखिर कितनी सक्रिय है? अब जरूरत है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच हो। स्टिंग में सामने आए वीडियो और बातचीत की सत्यता की जांच की जाए, संबंधित शराब दुकानों के बिक्री रिकॉर्ड और लाइसेंस की जांच हो तथा जिन पुलिसकर्मियों या अन्य कर्मचारियों के नाम सामने आए हैं, उनकी भूमिका की भी तथ्यात्मक जांच की जाए। फिलहाल बड़ा सवाल यही है—गीडा क्षेत्र में शराब बिक्री को लेकर सामने आ रहे आरोपों पर जिम्मेदार विभाग कब तस्वीर साफ करेंगे?

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