देवरिया बीआरडीपीजी कॉलेज, देवरिया में राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत दोनों इकाइयों

देवरिया बीआरडीपीजी कॉलेज, देवरिया में राष्ट्रीय सेवा योजना के अंतर्गत दोनों इकाइयों के सप्तदिवसीय विशेष शिविर का शुभारंभ महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य प्रो. ज्ञानेंद्र सिंह तथा विशिष्ट अतिथि प्रो. के.के ओझा ने माँ सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया। इसके पश्चात् तनुश्री भास्कर एवं यास्मीन ने सरस्वती वंदना एवं रोहन विश्वकर्मा तथा ऋतिक पटेल ने स्वागत गीत से अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के अध्यक्ष और मुख्य अतिथि ने ने शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सन् 1969 से राष्ट्रीय सेवा योजना अपने लक्ष्य सेवा एवं सहयोग के द्वारा युवाओं के सर्वांगीण विकास को निरन्तर आगे बढ़ा रही है। रासेयो के माध्यम से विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता का भी विकास होता है। इसमें समूह के लक्ष्य को स्वयं का लक्ष्य मानकर युवा अपने सामाजिक उत्तरदायित्व निर्वहन करता है। जिससे उसमें सेवा और सहयोग की भावना को बल मिलता है। सेवा और समर्पण से आत्मानुशासन की प्रवृत्ति को विस्तार मिलता है। आत्मसंयम से किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। प्रत्येक कार्य के प्रारंभ में कठिनाई का अनुभव होता है किंतु निरन्तर अभ्यास से वही कार्य आसान हो जाता है। रासेयो के इस विशेष शिविर के इन सात दिनों में सभी विद्यार्थी बिना किसी भेदभाव के एक समान दिनचर्या का पालन करते हैं तथा एक-दूसरे का सहयोग करते हुए सीखते हैं। यहाँ से जो हम सीख कर जाते हैं भावी जीवन में कठिन से कठिन परिस्थिति में भी यही अनुभव काम आता है। प्रथम दिवस के बौद्धिक सत्र में “डिजिटल इंडिया में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई) की भूमिका” विषय पर व्याख्यान देते हुए अतिथि वक्ता कृषि अर्थशास्त्र विभाग के सहायक आचार्य डॉ. राज जायसवाल ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई) ऐसी तकनीक है जो मशीन को मानव की तरह सोचने, सीखने और निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार की डिजिटल इंडिया पहल ने देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं और ए.आई इस परिवर्तन का प्रमुख आधार बन रहा है। राष्ट्र के नीति निर्माण में नीति आयोग द्वारा प्रस्तुत 'नेशनल स्ट्रेटजी फ़ॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' के माध्यम से 'ए.आई फ़ॉर ऑल' की अवधारणा को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने ए.आई के उपयोग को कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, ई-गवर्नेंस तथा स्मार्ट सिटी परियोजनाओं से जोड़ते हुए इसके व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता दिखाई तथा ए.आई के रोजगार, नैतिकता और डेटा गोपनीयता जैसे मुद्दों पर अपनी जिज्ञासाओं को प्रकट किया। वक्ता ने स्पष्ट किया कि ए.आई मानव का स्थान लेने के बजाय उसकी क्षमता को बढ़ाने वाला उपकरण है। कार्यक्रम का संचालन स्वयंसेवक सुधीर कुमार तथा धन्यवाद ज्ञापन स्वयंसेविका तनुश्री भास्कर ने किया। इस अवसर पर दोनों इकाइयों के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रद्योत कुमार सिंह और डॉ. विजय कुमार पाल, प्रो. समरेन्द्र बहादुर शर्मा, पूर्व कार्यक्रम अधिकारी डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. अमरेंद्र प्रताप सिंह, डॉ दिलीप शर्मा, डॉ. ओपी यादव, डॉ. हृदय कुमार, डॉ. विवेक कुमार सिंह डॉ. शुभम मिश्र, डॉ. राणा प्रताप सिंह आदि शिक्षकगण के साथ स्वयंसेवकों तथा स्वयंसेविकाओं की उपस्थिति रही।