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रिपोर्टर राहुल कुमार सिंह
Sultanpurलगभग २ घंटे पहले

वन विभाग की 'मिलीभगत' या लापरवाही: कादीपुर में धड़ल्ले से कट रहे

वन विभाग की 'मिलीभगत' या लापरवाही: कादीपुर में धड़ल्ले से कट रहे

वन विभाग की 'मिलीभगत' या लापरवाही: कादीपुर में धड़ल्ले से कट रहे सागवान के बेशकीमती पेड़ कार्यालय से महज 10 किमी की दूरी पर चल रहा आरा, शिकायतों के बाद भी विभाग बना मूकदर्शक *कादीपुर सुलतानपुर:* एक तरफ जहां शासन-प्रशासन पर्यावरण संरक्षण और वनीकरण को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं सुलतानपुर जिले के कादीपुर क्षेत्र में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कादीपुर वन क्षेत्राधिकार कार्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर मुड़िला बाज़ार के बगल गांव वारी में पिछले कई दिनों से सागवान के बेशकीमती पेड़ों पर अवैध रूप से आरा चल रहा है, लेकिन विभाग की चुप्पी कई तरह के संदेह पैदा कर रही है। जब स्थानीय लोगों ने इस अवैध कटान की जानकारी वन विभाग को दी, तो विभाग का जवाब हैरान करने वाला था। अधिकारियों का दावा है कि इन पेड़ों को काटने के लिए 10 पेड़ों की अनुमति (परमीशन) दी गई थी। हालांकि, घटनास्थल पर मौजूद कटे हुए पेड़ों के लट्ठों का अंबार विभाग के इस दावे की पोल खोल रहा है। स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि केवल 10 पेड़ों की अनुमति थी, तो कटान का यह सिलसिला एक हफ्ते तक कैसे चलता रहा? सवाल यह है कि क्या परमीशन के नाम पर अवैध कटान का खेल रचा जा रहा है? प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस गंभीर मामले की शिकायत विधिवत रूप से दिनांक 9 जून को सुलतानपुर के डीएफओ (DFO) से की गई थी। इसके बावजूद, घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई न होना विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करता है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी तादाद में पेड़ों का कटान संभव ही नहीं है। कार्यालय के इतने करीब और दिन-दहाड़े चल रहे इस अवैध कटान ने यह साबित कर दिया है कि माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। पर्यावरण को हो रहे इस नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या उच्च अधिकारी इस मामले की जांच करवाकर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे या 'मिलीभगत' का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?

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