*108 एंबुलेंस कर्मियों की सूझबूझ से बची जच्चा-बच्चा की जान: तारुन से अयोध्या ले जाते समय गंभीर प्रसू

जनपद अयोध्या के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) तारुन से जिला महिला अस्पताल (DWH) रेफर की गई एक गंभीर प्रसूता और उसके नवजात शिशु को 108 एंबुलेंस कर्मियों की त्वरित कार्रवाई और सूझबूझ से नया जीवन मिला है नाथनपुर की रहने वाली 25 वर्षीया खुशबू (पत्नी दुर्गेश) को प्रसव पीड़ा के दौरान अचानक सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी। हालत बिगड़ते देख डॉक्टरों ने उसे प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत जिला महिला अस्पताल अयोध्या के लिए रेफर कर दिया। मरीज के भाई दीपक ने रात 9:28 बजे 108 कंट्रोल रूम पर आपातकालीन सहायता के लिए कॉल किया, जिसके बाद एंबुलेंस (संख्या UP32EG6576) बिना किसी देरी के मौके पर पहुंची। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में महिला की हालत और ज्यादा नाजुक हो गई। इस नाजुक स्थिति को संभालते हुए एंबुलेंस में मौजूद ईएमटी (EMT) सुरेन्द्र कुमार मिश्रा ने तत्परता दिखाते हुए चलती एंबुलेंस में ही महिला को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा और उसकी लगातार निगरानी करते रहे। वहीं, पायलट सत्यदेव तिवारी ने बिना समय गंवाए तेजी और सतर्कता से एंबुलेंस चलाकर मरीज को समय रहते जिला महिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में समय पर पहुंचने और शुरुआती ऑक्सीजन सपोर्ट मिलने के कारण जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह से सुरक्षित हैं। मरीज के भाई दीपक ने 108 सेवा और एंबुलेंस कर्मियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "अगर एंबुलेंस में समय पर ऑक्सीजन और देखभाल न मिलती, तो मेरी बहन की जान को खतरा हो सकता था। ईएमटी सुरेन्द्र और पायलट सत्यदेव ने भगवान का रूप बनकर मेरी बहन और बच्चे की जान बचाई है।" इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि 108 एंबुलेंस सेवा आपात स्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो रही है।