Bansgaon Sandesh
Login
Tapan Kumar Bose
Lucknow२४ मिनट पहले

यूपी: मरीजों से खुलेआम लूट, 74 रुपये का इंजेक्शन 4980 में बेचा

यूपी: मरीजों से खुलेआम लूट, 74 रुपये का इंजेक्शन 4980 में बेचा

यूपी: मरीजों से खुलेआम लूट, 74 रुपये का इंजेक्शन 4980 में बेचा जा रहा, FSDA की जांच में सनसनीखेज खुलासा *लखनऊ।* उत्तर प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों और निजी अस्पतालों की फार्मेसियों में मरीजों से खुलेआम लूट चल रही है। जीवनरक्षक दवाओं से लेकर छोटे-छोटे मेडिकल उपकरणों तक की कीमत में 10 से 67 गुना तक का अंतर मिला है। यह खुलासा *उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA)* की जांच में हुआ है। 214 फार्मेसियों की जांच में 36 दवाओं में 10 गुना से ज्यादा मुनाफा FSDA ने प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और निजी अस्पतालों की 214 फार्मेसियों से आंकड़े जुटाए। इनमें से 130 दवाओं का विश्लेषण किया गया। जांच में पाया गया कि 36 दवाओं की MRP उनकी खरीद कीमत से 10 गुना से भी ज्यादा है। कुछ में तो यह अंतर 67 गुना तक है। सबसे बड़ा मामला बैक्टीरियल संक्रमण में इस्तेमाल होने वाले *पॉलीमिक्सिन-B इंजेक्शन* का है। इसकी खरीद कीमत सिर्फ *74.09 रुपये* है, जबकि अस्पताल की फार्मेसी में इसकी MRP *4980.94 रुपये* पाई गई। यानी करीब 67 गुना ज्यादा। इसी तरह लिवर की गंभीर बीमारी में लगने वाले एक इंजेक्शन की खरीद कीमत 56 रुपये मिली, लेकिन MRP 3050 रुपये है। गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण में इस्तेमाल होने वाले मेरोपेनेम 1 ग्राम के अलग-अलग ब्रांड में भी खरीद और MRP का अनुपात एक जैसा नहीं मिला। इसमें MRP खरीद से 5.31 से 9.98 गुना तक ज्यादा दर्ज है। फंगल संक्रमण की दवा *कास्पोफंगिन 70 MG* का एक ब्रांड 800 रुपये में खरीदा गया, लेकिन उसकी MRP 21,230 रुपये है - यानी 26.5 गुना ज्यादा। इसी दवा के दूसरे ब्रांड की खरीद 897.75 रुपये और MRP 19,892 रुपये मिली। कैंसर और अन्य जीवनरक्षक दवाओं में भी इसी तरह का बड़ा अंतर मिला है। दवा ही नहीं, उपकरणों में भी लूट दवाओं के अलावा मेडिकल उपकरणों की कीमत में भी बड़ा खेल मिला है। एक *3-तरफा स्टॉप कॉक* की खरीद कीमत 6.40 रुपये है, जबकि MRP 163 रुपये है - खरीद से 25 गुना अधिक। एक अन्य उपकरण की खरीद 20.95 रुपये के मुकाबले MRP 500 रुपये मिली, जो 24 गुना ज्यादा है। मोनोपॉली दवाओं से फंसाए जा रहे मरीज FSDA की रिपोर्ट में कहा गया है कि निजी अस्पतालों में मोनोपॉली दवाओं के जरिए मरीजों को लूटा जा रहा है। अस्पताल की फार्मेसी में ऐसी दवाएं रखी जाती हैं जो खुले बाजार में उपलब्ध नहीं होतीं। मजबूरी में मरीजों को वहीं से दवा लेनी पड़ती है और वे उसके असली बाजार मूल्य की तुलना भी नहीं कर पाते। विभागीय विश्लेषण में आशंका जताई गई है कि ऊंचे व्यापार लाभ और छूट की गुंजाइश बनाए रखने के लिए जानबूझकर दवाओं और उपकरणों की MRP बहुत ज्यादा रखी जा रही है।

0 likes
0 comments2 shares