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Pradhan Pravasi
Gorakhpur६ मिनट पहले

ईटार बनेगा ‘ईटार धाम’! स्वामीनारायण की जन्मभूमि को मिलेगी नई पहचान, महंतों

ईटार बनेगा ‘ईटार धाम’! स्वामीनारायण की जन्मभूमि को मिलेगी नई पहचान, महंतों

ईटार बनेगा ‘ईटार धाम’! स्वामीनारायण की जन्मभूमि को मिलेगी नई पहचान, महंतों और नेताओं ने किया बड़ा ऐलान” आमी तट की तपोभूमि से उठी धर्म की हुंकार — जहां कभी जली थी बस्ती, वहीं अब बनेगा भव्य स्वामीनारायण मंदिर सहजनवा-घघसरा | गोरखपुर गोरखपुर जनपद की सहजनवा तहसील स्थित नगर पंचायत घघसरा के राजस्व ग्राम ईटार (पाण्डेय) में शनिवार को इतिहास, आस्था और आध्यात्म का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया। विश्वविख्यात श्री स्वामीनारायण मंदिर जेतलपुर (अहमदाबाद, गुजरात) के द्विशताब्दी महोत्सव की स्मृतियों में आयोजित भव्य सम्मान समारोह में देशभर से पहुंचे संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं ने एक स्वर में घोषणा की — “अब ईटार सिर्फ गांव नहीं, ईटार धाम कहलाएगा।” कार्यक्रम में मौजूद महंत स्वामी पुरुषोत्तमप्रकाशदासजी सहित कई संतों ने कहा कि यह धरती साधारण नहीं बल्कि महापुरुषों की तपोभूमि है। यहां जन्मे पूर्वजों की परंपरा आज विश्व के 128 देशों तक भगवान स्वामीनारायण के रूप में पूजी जा रही है। मंच से घोषणा की गई कि जल्द ही यहां भगवान स्वामीनारायण का भव्य मंदिर निर्माण कराया जाएगा और सरकार से ईटार गांव को “ईटार धाम” घोषित करने की मांग की जाएगी। 200 साल पुराना दर्दनाक इतिहास, जिसने बना दिया ईटार को तपोभूमि आमी नदी के किनारे बसा ईटार पाण्डेय गांव कभी साधु-संतों, ऋषि-मुनियों और तपस्वियों की भूमि माना जाता था। गांव में प्राचीन शिव मंदिर और कुलदेवी चामुंडा माता का स्थान था। ब्राह्मण समाज यहां तप, पूजा और वैदिक परंपराओं के साथ जीवन व्यतीत करता था। किंवदंती के अनुसार, एक दिन बाशी राज्य का राजा शिकार करते हुए जंगल पहुंचा। एक हिरण जान बचाने के लिए शिव मंदिर में पूजा कर रहे ब्राह्मणों की शरण में जा पहुंचा। राजा के सैनिकों ने हिरण सौंपने का आदेश दिया, लेकिन ब्राह्मणों ने धर्म की रक्षा को सर्वोपरि बताते हुए इंकार कर दिया। बताया जाता है कि इसी बात से क्रोधित राजा ने पूरे गांव को चारों ओर से घेरकर आग लगवा दी। चीख-पुकार के बीच पूरा गांव जलकर राख हो गया। मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की दर्दनाक मौत ने ईटार की धरती को शोक और तपस्या की भूमि बना दिया। राजा का होगा सर्वनाश” — बाबा टेकधर का श्राप बना इतिहास घटना के बाद गांव लौटे तपस्वी बाबा टेकधर ने पूरे नरसंहार की कथा सुनकर बाशी राजा को श्राप दिया कि ब्रह्महत्या का दोष उसके पूरे वंश को समाप्त कर देगा। कहा जाता है कि इसके बाद राजा का राजपाट उजड़ने लगा और उत्तराधिकारी समाप्त हो गए। नेपाल के विद्वान ब्राह्मणों की सलाह पर राजा ने बाबा टेकधर की समाधि को राजदरबार में स्थापित कराया और नियमित पूजा शुरू कराई। किंतु श्राप से पूरी मुक्ति नहीं मिल सकी और अंततः राजमहल खंडहर में तब्दील हो गया। स्वामीनारायण परंपरा से जुड़ी ईटार की पहचान धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान स्वामीनारायण के पूर्वजों की जन्मस्थली भी यही ईटार पाण्डेय गांव है। यही कारण है कि गुजरात सहित देश-विदेश से श्रद्धालुओं का इस गांव से गहरा आध्यात्मिक संबंध रहा है। भारत के शंकराचार्य मुक्तेश्वरानंद सरस्वती पाण्डेय की पूर्वज भूमि भी इसी गांव को बताया जाता है। संतों और नेताओं का बड़ा ऐलान सम्मान समारोह में पहुंचे मुख्य अतिथि सर्वेश पाठक ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार स्तर पर हरसंभव प्रयास किया जाएगा ताकि ईटार गांव को धार्मिक धाम के रूप में विकसित किया जा सके। वहीं विधायक प्रदीप शुक्ला, पूर्व मंत्री जीएम सिंह, पूर्व विधायक शीतल पाण्डेय, अश्वनी त्रिपाठी, नगर पंचायत अध्यक्ष प्रभाकर दुबे समेत तमाम अतिथियों ने गांव की आध्यात्मिक विरासत को संरक्षित करने का संकल्प लिया। हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में हुआ भव्य आयोजन कार्यक्रम में सत्संग, प्रवचन, अतिथि सम्मान, उपहार वितरण और विशाल प्रसाद वितरण का आयोजन हुआ। गुजरात के जेतलपुर धाम से आए संतों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी से पूरा ईटार गांव भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आया। गांव के प्रधान प्रतिनिधि विनोद कुमार पाण्डेय उर्फ भोरई बाबा के नेतृत्व में हुए इस आयोजन को लेकर लोगों में भारी उत्साह देखने को मिला। जिस धरती ने नरसंहार की आग देखी… अब वहीं गूंजेगा धर्म, भक्ति और सनातन का जयघोष — ईटार से ईटार धाम बनने की कहानी शुरू हो चुकी है।”

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