इबोला संक्रमण को लेकर बढ़ी चिंता इंडो-नेपाल बॉर्डर पर स्थायी चेकपोस्ट की
इबोला संक्रमण को लेकर बढ़ी चिंता इंडो-नेपाल बॉर्डर पर स्थायी चेकपोस्ट की मांग, मिशन सेव इन इंडिया ने उठाई आवाज गोरखपुर। वैश्विक स्तर पर इबोला संक्रमण को लेकर बढ़ती आशंकाओं के बीच भारत सरकार जहां वायु मार्ग और जल मार्ग पर नियंत्रण को लेकर गंभीर नजर आ रही है, वहीं इंडो-नेपाल की सैकड़ों किलोमीटर लंबी खुली जमीनी सीमा को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। मिशन सेव इन इंडिया के प्रतिनिधि डा. आर.एन. सिंह ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से ठोस कदम उठाने की मांग की है। डा. सिंह ने कहा कि केवल हवाई और जल मार्ग पर नियंत्रण से किसी भी वैश्विक महामारी को रोकना पर्याप्त नहीं होगा। भारत-नेपाल के बीच खुली सीमा से लोगों का निरंतर आवागमन होता रहता है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। ऐसे में इस जमीनी सीमा की अनदेखी करना गंभीर चूक साबित हो सकती है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में सार्स के वैश्विक संकट के दौरान मिशन सेव इन इंडिया के प्रयासों से सोनौली-भैरहवा समेत कई प्रमुख बॉर्डरों पर चेकपोस्ट और आइसोलेशन वार्ड बनाए गए थे, जिसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला और महामारी भारत में व्यापक स्तर पर नहीं फैल सकी। इसी तरह वर्ष 2020 में कोविड-19 के दौरान भी संगठन के आग्रह पर इंडो-नेपाल सीमा पर कई चेकपोस्ट स्थापित किए गए थे। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए डा. आर.एन. सिंह ने मांग की है कि सभी प्रमुख इंडो-नेपाल बॉर्डरों पर स्थायी चेकपोस्ट बनाए जाएं, जहां स्वास्थ्य जांच, स्क्रीनिंग और आइसोलेशन की समुचित व्यवस्था हो। उनका कहना है कि यह कदम न केवल इबोला बल्कि भविष्य में आने वाली किसी भी महामारी से देश को सुरक्षित रखने में कारगर साबित होगा। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि देशहित में इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाए और जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि खुले आवागमन के कारण संक्रमण फैलने की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।