महाराणा प्रताप की जयंती पर उमड़ा जनसैलाब: 'घास की रोटी' खाकर मातृभूमि

महाराणा प्रताप की जयंती पर उमड़ा जनसैलाब: 'घास की रोटी' खाकर मातृभूमि की रक्षा करने वाले वीर शिरोमणि को गोरखपुर ने किया नमन गोरखपुर | 12 मई राष्ट्र नायक और अदम्य साहस के प्रतीक महाराणा प्रताप की जयंती के अवसर पर आज गोरखपुर रेलवे स्टेशन स्थित उनकी प्रतिमा पर भव्य पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वरिष्ठ समाजसेवी संदीप कुमार शाही के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया और वीर शिरोमणि की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उनके शौर्य को याद किया। स्वाभिमान का प्रतीक: मुगलों के आगे कभी नहीं झुके प्रताप इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि जब देश के कई राजा मुगलों की अधीनता स्वीकार कर रहे थे, तब महाराणा प्रताप ने महलों का सुख त्याग कर जंगलों में रहना स्वीकार किया। उन्होंने 'घास की रोटी' खाना मंजूर किया, लेकिन अपनी मातृभूमि और स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं किया। उनके जीवन का संघर्ष आज भी समाज और युवा पीढ़ी के लिए राष्ट्रप्रेम की सबसे बड़ी प्रेरणा है। इन दिग्गजों की रही गरिमामय उपस्थिति कार्यक्रम का कुशल संचालन सुधीर सिंह ने किया। इस दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित विभूतियाँ उपस्थित रहीं: डॉ. विश्रांत चंद्र कौशिक (पूर्व राज्य मंत्री) राणा राहुल सिंह (वरिष्ठ भाजपा नेता) प्रोफेसर डॉ. दीपक सिंह, फणेन्द्र कुमार सिंह 'बबलू', सोमेश्वर सिंह 'सोनू', विश्वजीत शाही। विनोद सिंह, अमित कुमार सिंह, कृष्णेश शाही, देवानन्द सिंह, राजेश सिंह, मयंक सिंह, सूर्य प्रताप सिंह, धनन्जय सिंह, अजय सिंह, और कमलेश गौड़ सहित सैकड़ों लोग। समाज के लिए संदेश वरिष्ठ समाजसेवी संदीप कुमार शाही ने जोर देते हुए कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक राजा नहीं, बल्कि एक विचार हैं। उनकी वीरता की गाथाएं हमें सिखाती हैं कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों पर अडिग कैसे रहा जाता है। सभी उपस्थित लोगों ने जयघोष के साथ वीर सपूत को कोटि-कोटि नमन किया।