पिपराइच चीनी मिल में गन्ने की वैज्ञानिक खेती पर संयुक्त प्रशिक्षण, नई प्रजातियों की पहचान कराई गई

पिपराइच, गोरखपुर। बांसगांव संदेश। चीनी मिल पिपराइच के सभागार में मंगलवार को मुख्य गन्ना प्रबंधक जगत राज की अध्यक्षता में चीनी मिल पिपराइच के स्टाफ एवं राजकीय गन्ना पर्यवेक्षकों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान गन्ना शोध केन्द्र सेवरही, कुशीनगर के वैज्ञानिकों द्वारा गन्ने की वैज्ञानिक खेती, उन्नत प्रजातियों तथा आधुनिक तकनीकों पर संयुक्त प्रशिक्षण दिया गया। गन्ना शोध केन्द्र सेवरही के वैज्ञानिक डॉ. वाई. पी. भारती एवं डॉ. के. पी. सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान कहा कि वर्तमान समय में परंपरागत खेती पर्याप्त लाभकारी नहीं है। किसानों को गन्ने की नई एवं उन्नत प्रजातियों को अपनाना चाहिए। उन्होंने 118, 14201, 9301, 5125, 10239 जैसी प्रजातियों की पहचान कराते हुए उनकी विशेषताओं और उत्पादन क्षमता की जानकारी दी। साथ ही वैज्ञानिक एवं सहफसली खेती के लाभों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। इसके बाद गन्ना शोध संस्थान पिपराइच के निदेशक ज्ञानेश्वर मिश्र की उपस्थिति में केन्द्र के प्लॉटों तथा किसानों द्वारा बोई गई नई प्रजातियों का स्थलीय निरीक्षण कर पहचान कराई गई। मुख्य गन्ना प्रबंधक जगत राज ने बसंत कालीन गन्ना बुवाई के लिए बीज सत्यापन एवं सुरक्षित रखने के निर्देश दिए। एससीडीआई सुनील कुमार यादव ने निर्देशित किया कि आगामी 05 फरवरी 2026 तक सभी पौधशालाओं एवं सामान्य प्लॉटों में उपलब्ध गन्ना बीज का सत्यापन कर बीज रोकना सुनिश्चित किया जाए। बैठक में सरदारनगर के एससीडीआई सतीश कुमार सिंह, गन्ना प्रबंधक मनोज तिवारी, गन्ना पर्यवेक्षक सुशील पाठक, अरविंद तिवारी, चन्द्र मान गुप्ता, मनीष मणि, धर्मेंद्र कुमार सहित गोरखपुर एवं महाराजगंज के गन्ना पर्यवेक्षक और चीनी मिल के कर्मचारी उपस्थित रहे।