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Gorakhpur४ दिन पहले

प्राचीन हनुमान मंदिर प्रांगण में राम दरबार मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा: चौथे

प्राचीन हनुमान मंदिर प्रांगण में राम दरबार मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा: चौथे

प्राचीन हनुमान मंदिर प्रांगण में राम दरबार मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा: चौथे दिन उमड़ा 20 हजार श्रद्धालुओं का जनसैलाब बेलघाट बांसगांव संदेश प्राचीन हनुमान मंदिर प्रांगण में नवनिर्मित राम दरबार मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान एवं श्रीराम कथा के चौथे दिवस का वातावरण भक्ति, श्रद्धा और उत्साह से ओत-प्रोत रहा। श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति से पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित दिखाई दिया। कथा व्यास आचार्य शांतनु जी महाराज ने अपने ओजस्वी एवं भावपूर्ण प्रवचनों से उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने भगवान श्रीराम के जनकपुर आगमन का मार्मिक वर्णन करते हुए कहा कि गुरुदेव विश्वामित्र के सानिध्य में भगवान राम और लक्ष्मण जनकपुर में प्रवेश करते हैं। यह प्रसंग भक्ति और भगवान के मिलन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जीवन में जब भी भक्ति और अध्यात्म की यात्रा करनी हो, गुरु का सानिध्य अनिवार्य है। पुष्प वाटिका प्रसंग का वर्णन करते हुए महाराज जी ने कहा कि यही वह पावन स्थल है जहां भगवान और भक्ति स्वरूपा माता जानकी का प्रथम मिलन हुआ। उन्होंने किशोरावस्था को जीवन का अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील काल बताते हुए कहा कि बालकों को गुरु पूजा और बालिकाओं को गौरी पूजा के माध्यम से मर्यादा, आज्ञाकारिता, करुणा और संस्कारों को जीवन में उतारना चाहिए। धनुष यज्ञ प्रसंग में उन्होंने बताया कि अनेक राजाओं ने भगवान शिव के धनुष को तोड़ने का प्रयास किया, किंतु कोई सफल न हो सका। भगवान श्रीराम ने क्षणभर में धनुष भंग कर यह सिद्ध किया कि धनुष अहंकार का प्रतीक है और भगवान क्षणमात्र में अहंकार का नाश कर देते हैं। इसके साथ ही श्रीराम और जानकी का दिव्य विवाह संपन्न हुआ। लक्ष्मण-परशुराम संवाद का भी भावपूर्ण वर्णन किया गया। विदाई प्रसंग में महाराज जी ने कहा कि बेटियां ही घर की लक्ष्मी होती हैं। पिता और पुत्री का संबंध संसार का सबसे पवित्र रिश्ता है। विदाई के क्षणों में कठोर से कठोर हृदय भी भावुक हो उठता है। कार्यक्रम में जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह, विधायक तेज प्रताप सिंह (बस्ती), रणवीर शाही ‘चंचल’ सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही। श्री राम चौहान सहित हजारों श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर धर्मलाभ प्राप्त किया। चौथे दिन भी लगभग 20,000 श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा। आयोजन समिति एवं राम भक्तों द्वारा हलवे का प्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। संपूर्ण आयोजन सुव्यवस्थित, भव्य और आध्यात्मिक गरिमा से परिपूर्ण रहा।

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