भगवान नृसिंह की शोभा यात्रा से बदला होली पर्व का स्वरूप *आस्था
भगवान नृसिंह की शोभा यात्रा से बदला होली पर्व का स्वरूप *आस्था और पवित्रता के साथ रंग खेलने में बढ़ी संभ्रांत तबके की भागीदारी* डी पी गुप्ता सुल्तानपुर। सनातन धर्म के पावन पर्व होली के अवसर पर भगवान श्री नृसिंह जी की शोभा यात्रा की परंपरा ने जिले में होली उत्सव के स्वरूप को सकारात्मक दिशा दी है। इस धार्मिक आयोजन से जहां समाज में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है, वहीं आस्था और मर्यादा के साथ होली मनाने की भावना भी मजबूत हुई है। गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी होली के रंग खेलने वाले दिन भगवान नृसिंह जी की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इस आयोजन के चलते ऐसे लोग भी अब होली के दिन घरों से बाहर निकलकर उत्सव में शामिल होने लगे हैं, जो पहले किसी कारणवश इस पर्व से दूरी बनाए रखते थे। शोभा यात्रा के दौरान पूरे नगर में भगवान नृसिंह जी के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालु नाचते-गाते और एक-दूसरे को गुलाल लगाते हुए नगर भ्रमण करते रहे, जिससे सामाजिक एकता, भाईचारे और आपसी सौहार्द की भावना को भी बल मिला। इस आयोजन का विश्लेषण करते हुए समाजसेवी पत्रकार डी पी गुप्ता लिखते हैं कि ये बात गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में डीजे, फूहड़ नृत्य और नशे के बढ़ते चलन के कारण इस पावन पर्व की गरिमा और पवित्रता प्रभावित हो रही थी। इसके चलते समाज का एक बड़ा और संभ्रांत वर्ग होली के दिन घरों से बाहर निकलने से परहेज करने लगा था। हालांकि, बीते वर्ष से स्थिति में तब सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुशल मार्गदर्शन में जिले में होलिकोत्सव समिति कुशभवनपुर का गठन किया गया। समिति द्वारा भगवान नृसिंह जी की शोभा यात्रा के आयोजन ने होली उत्सव को नई दिशा प्रदान की और इसके धार्मिक व सांस्कृतिक स्वरूप को पुनर्जीवित किया। जिले के लोगों में अब यह उम्मीद भी जगी है कि आगामी दुर्गा पूजा विसर्जन जैसे आयोजनों में भी समाज के जिम्मेदार लोग आगे आकर सनातन परंपराओं की पवित्रता और शुचिता बनाए रखने के लिए जनजागरूकता का कार्य करेंगे।