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Sonbhadraलगभग १ घंटा पहले

सड़क हादसों में अब नहीं रुकेगा इलाज, पीएम राहत बनेगी जीवनरक्षक

सड़क हादसों में अब नहीं रुकेगा इलाज, पीएम राहत बनेगी जीवनरक्षक

सड़क हादसों में अब नहीं रुकेगा इलाज, पीएम राहत बनेगी जीवनरक्षक एक घंटा अनमोल: गोल्डन आवर में उपचार से बचेंगी अनगिनत जानें सोनभद्र/सड़क दुर्घटनाएं आज देश की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुकी हैं। हर वर्ष हजारों लोग सड़क हादसों में अपनी जान गंवा देते हैं, जबकि लाखों लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दुर्घटना के बाद का पहला घंटा, जिसे गोल्डन आवर कहा जाता है, किसी भी घायल व्यक्ति के जीवन और मृत्यु के बीच निर्णायक भूमिका निभाता है। यदि इस दौरान उचित चिकित्सा सहायता मिल जाए तो मृत्यु दर को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसी सोच को साकार करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पीएम राहत (PM-RAHAT) योजना एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को दुर्घटना के बाद सात दिनों तक अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। यह व्यवस्था न केवल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए राहत लेकर आई है, बल्कि यह सुनिश्चित भी कर रही है कि इलाज के अभाव में किसी की जान न जाए। सोनभद्र जनपद में पंचशील मल्टी स्पेशियल्टी हॉस्पिटल द्वारा इस योजना के अंतर्गत कैशलेस उपचार की शुरुआत होना एक सकारात्मक और सराहनीय कदम है। घोरावल क्षेत्र के घायल किशोर अनिल कुमार का इस योजना के तहत उपचार किया जाना इस बात का उदाहरण है कि समय पर अस्पताल पहुंचाने और त्वरित चिकित्सा उपलब्ध कराने से जीवन बचाया जा सकता है। अक्सर दुर्घटना के बाद लोग अस्पताल ले जाने में देर कर देते हैं या उपचार के खर्च की चिंता में उलझ जाते हैं। कई बार यही देरी घातक साबित होती है। पीएम राहत योजना इस समस्या का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करती है। अब दुर्घटना पीड़ित को तत्काल अस्पताल पहुंचाने पर उपचार की आर्थिक चिंता नहीं करनी पड़ेगी। इस योजना की सफलता केवल सरकारी प्रयासों पर निर्भर नहीं है, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि सड़क दुर्घटना देखने पर घायल की सहायता करे और उसे शीघ्र अस्पताल पहुंचाने में सहयोग दे। जागरूकता, संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई कई परिवारों को अपूरणीय क्षति से बचा सकती है। आज आवश्यकता इस बात की है कि पीएम राहत योजना की जानकारी गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचे। प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, सामाजिक संगठन और मीडिया मिलकर जनजागरूकता अभियान चलाएं ताकि प्रत्येक नागरिक इस सुविधा से परिचित हो सके। सड़क सुरक्षा केवल नियमों का विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन की रक्षा का संकल्प है। गोल्डन आवर में मिला उपचार किसी घायल को नया जीवन दे सकता है। इसलिए समय की कीमत समझें, दुर्घटना पीड़ितों की मदद करें और जीवन बचाने की इस मुहिम का हिस्सा बनें। यही एक संवेदनशील और जिम्मेदार समाज की पहचान है।

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