मुंबई के फैशन मंच पर छाई मेजवां की चिकनकारी, ग्रामीण महिला कारीगरों के हुनर ने बटोरी वाहवाही

आजमगढ़। मेजवां की महिलाओं और बालिकाओं के हाथों से तैयार होने वाली पारंपरिक चिकनकारी ने मुंबई के फैशन मंच पर एक बार फिर आजमगढ़ की पहचान को मजबूत किया। अभिनेत्री शबाना आजमी की पहल पर संचालित मेजवां वेलफेयर सोसाइटी की ओर से मुंबई के ताज लैंड्स एण्ड, बांद्रा में 15वां मेजवां फैशन शो आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मेजवां की महिला कारीगरों की बारीक कढ़ाई को आधुनिक फैशन के साथ प्रस्तुत किया गया। मेजवां फैशन शो के जरिए महिला कारीगरों की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की पहल के 15 वर्ष पूरे हुए। वर्ष 2010 में शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक चिकनकारी को संरक्षण देने के साथ ही ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना रहा है। फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ने मेजवां की महिला कारीगरों द्वारा तैयार की गई चिकनकारी को आधुनिक फैशन से जोड़ा। शो में आइवरी, गहरे हरे, कोरल और ओम्ब्रे रंगों के परिधानों के साथ वेलवेट, शीयर फैब्रिक, सेक्विन, सिल्वर डिटेलिंग और जरदोजी शैली के काम को शामिल किया गया। बारीक धागे की कढ़ाई और आधुनिक डिजाइन के मेल ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। विक्की कौशल और आलिया भट्ट ने किया रैंप वॉक फैशन शो में अभिनेता विक्की कौशल ने चिकनकारी और सेक्विन वर्क वाली शेरवानी जैकेट पहनकर रैंप वॉक किया। वहीं अभिनेत्री आलिया भट्ट ने आइवरी रंग के आधुनिक परिधान में शो का समापन किया। उनके परिधान में चिकनकारी पल्लू के साथ क्रॉप्ड ब्लाउज और कढ़ाई वाली स्कर्ट को शामिल किया गया था। महिला सशक्तीकरण का माध्यम बनी चिकनकारी शबाना आजमी ने कहा कि मेजवां की महिलाएं और बालिकाएं बेहद हुनरमंद और मेहनती हैं। उनके हाथों से तैयार चिकनकारी ने पिछले 15 वर्षों में देश-दुनिया में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने कहा कि मेजवां की कला अब फिल्म और फैशन इंडस्ट्री के साथ अन्य क्षेत्रों में भी पहचान बना रही है। महिला कारीगरों के हुनर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने का प्रयास आगे भी जारी रहेगा। मेजवां की चिकनकारी अब ग्रामीण महिलाओं के लिए केवल पारंपरिक कला नहीं, बल्कि रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सशक्तीकरण का जरिया भी बन रही है। मुंबई के फैशन मंच पर मेजवां की कारीगर महिलाओं के हुनर की प्रस्तुति ने आजमगढ़ की कला और संस्कृति को नई पहचान दिलाई।