'सरकारी' 'खजानें' की 'आहुति' दे रहीं 'देवहुति'

'सरकारी' 'खजानें' की 'आहुति' दे रहीं 'देवहुति' नगरपालिका,नगर पंचायतों में हो रहे बड़े खेलों से अधिकारी अनजान! सत्ता संरक्षित नगर पंचायतों में चरम पर भ्रष्टाचार! तीन जगहों का चार्ज,बेशुमार दौलत से ही अप डाउन संभव! गैर जनपदों से ठेकेदारों को बुलाकर दिया जा रहा काम! सेटिंग वाले ठेकेदारों के साथ अध्यक्ष एवं ईओ लेते हिस्सेदारी! खागा की कान्हा गौशाला में गौवंशों की संख्या के खेल की जांच नहीं हो सकी पूरी! आम चर्चा जिलाधिकारी वाले तहसील समाधान दिवस से गायब हो जातीं खागा ईओ! अहम और वहम दोनों,खास हैं सत्ताधारी नेताओं की! जब सत्ता का गुमान हो तो फिर कमजोर से कमजोर बलवान हो ही जाता है।यही हाल तीन नगर पंचायतों का काम देख रहीं अधिशाषी अधिकारी का है।गैर जनपद के चहेते ठेकेदारों को काम देने से लेकर सरकारी खजाने की 'आहुति' देने में 'देवहुती' चैंपियन साबित हो रही हैं। दिखाने के लिए तो फतेहपुर मुख्यालय में उनका कमरा है लेकिन रोजाना कानपुर से अप-डाउन करना उनकी आदत में शुमार है। पर्ची किसी की और तेल कहीं का भी खेल खेला जा रहा है।गत वर्ष कान्हा गौशाला में हुए बड़े खेल को लेकर भी वह चर्चा में रहीं। गौवंश कम और संख्या अधिक दिखा कर धन के हुए बंदरबांट की जांच की फाइल धूल फांक रही है। नगर पंचायतों में बोगस टेंडरिंग बड़ी कमाई का जरिया बन रही हैं।खागा भी इस खेल में पीछे नहीं है। हालत यह है कि चहेते ठेकेदारों को बाहर से बुलाकर गुप-चुप तरीके से काम देने का चल रहा खेल लंबे समय से हो रहा है। रायबरेली,कौशांबी सहित अन्य जगहों के ठेकेदार मोटा कमीशन देकर काम कर रहे हैं।कई ठेकेदार तो ऐसे भी हैं जिनमें अध्यक्षों एवं अधिशाषी अधिकारियों की हिस्सेदारी तक रहती है। खागा में अधिकारियों के अलावा आम चर्चा है कि जिलाधिकारी वाले तहसील समाधान दिवस में अधिशाषी अधिकारी देवहुती पांडे अवकाश पर ही रहती हैं। पिछला समाधान दिवस भी उनकी गैर मौजूदगी का गवाह बना जब जिलाधिकारी निधि गुप्ता वत्स ने ईओ को बुलाया तो उनका एक कर्मचारी पहुंचा।बगल में बैठे अधिकारी ही फुसफुसाए की मैडम तो आज छुट्टी में होगीं। यानी जग जाहिर है कि जब जिलाधिकारी का समाधान दिवस खागा में होगा तो वह अनुपस्थित रहेंगीं।आखिर जिले की मुखिया से इतनी दूरी क्यों है? सोने पर सुहागा यह है कि अपनी मनमानी के लिए जानी जा रही अधिशाषी अधिकारी के पास हथगांम एवं धाता नगर पंचायत का भी अतिरिक्त कार्यभार है।जो खेल यहां है उसी को इन नगर पंचायतों में भी आगे निकल कर किया जा रहा है। कानपुर से रोजाना अप डाउन करने वाली ईओ को उच्चाधिकारियों का खौफ ही नहीं है। अहम एवं वहम इस बात का है कि उनको संरक्षण कई सत्ताधारी बड़े नेता दे रहे हैं। निजी वाहन से कानपुर से आवागमन करने वाली ईओ की गाड़ी में पड़ने वाले तेल में भी खेल खूब खेला जा रहा है।पर्ची किसी की ओर तेल किसी में। बीते साल नगर पंचायत के अधीन कान्हा गौशाला में बड़े पैमाने पर हुए खेल की जांच में भी घपलेबाजी सामने तो आई लेकिन हुआ क्या?यह किसी को पता ही नहीं है!नाम की आदर्श नगर पंचायत लेकिन काम एवं घपलेबाजी के मामले में कलंक गाथा जगजाहिर है सत्ता संरक्षित नगर पालिका,नगर पंचायतें भ्रष्टाचार का बड़ा अड्डा बन गई हैं।टेंडर में चहेते ठेकेदारों को काम देकर मोटी कमाई करने वाली नगर पंचायतों के जिम्मेदार ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं। इनकी जांच से सरकारी खजाने के बड़े दुरुपयोग का पुलिंदा खुलकर सामने आएगा लेकिन देखना यह है कि पहले जांच और फिर जांच की आंच से कौन-कौन झुलसने वाला है l