प्रेम शाश्वत और अलौकिक होता है पं चंद्रकांत मिश्र

चौरी चौरा गोरखपुर। प्रेम शाश्वत और अलौकिक होता है दूर होने के बावजूद भी प्रेम का संचार बना रहता है उक्त बाते पंडित चंद्रकांत मिश्र ने गौनर गांव में यजमान विश्वनाथ उपाध्याय रामसंवारी देवी द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कहीं उन्होंने श्रीकृष्ण देवी रुक्मिणी के प्रेम का वर्णन करते हुए कहा कि जबभी नारद जी राजा भीष्मत के पास जाते थे भगवान कृष्ण के गुण और रूप का वर्णन करते थे जिसे रुक्मिणी सुनती थीं बार बार श्रीकृष्ण की चर्चा सुनकर उन्हें मन ही मन भगवान कृष्ण से प्रेम करने लगी ।इसी तरह नारद जी जब भी श्रीकृष्ण के पास जाते थे तो देवी रुक्मिणी के गुण और रूप की चर्चा करते थे जिसे सुनकर भगवान कृष्ण भी रुक्मिणी से प्रेम करने लगे इस तरह श्रीकृष्ण और रुक्मिणी में प्रेम हो गया। सात्विक प्रेम में दूरी का कोई महत्व नहीं होता है प्रेम अलौकिक होता है। इस अवसर पर राकेश उपाध्याय चंद्रभूषण उपाध्याय शशांक , कुंज उपाध्याय जितेंद्र कसौधन चंद्रभूषण ओझा रामेश्वर कश्यप रुद्रप्रताप कसौधन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।