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Gazipurलगभग १ घंटा पहले

कर्मकांड के प्रकांड विद्वान प्रहलाद पांडेय का हृदयगति रुकने से निधन अचानक

कर्मकांड के प्रकांड विद्वान प्रहलाद पांडेय का हृदयगति रुकने से निधन अचानक

कर्मकांड के प्रकांड विद्वान प्रहलाद पांडेय का हृदयगति रुकने से निधन अचानक सीने में उठा दर्द, अस्पताल ले जाते समय रास्ते में थमी सांस; शोक में डूबा रामपुर बलभद्र गांव जखनिया/गाज़ीपुर। तहसील जखनिया क्षेत्र के ग्राम सभा रामपुर बलभद्र निवासी कर्मकांड के प्रकांड विद्वान प्रहलाद पांडेय (50) का गुरुवार की भोर हृदयगति रुकने से आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही स्वजन, शिष्य एवं शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई। धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में सक्रिय रहने वाले प्रहलाद पांडेय के निधन से गांव सहित आसपास के क्षेत्र में शोक का माहौल है।परिजनों के अनुसार एक अक्टूबर की भोर करीब चार बजे प्रहलाद पांडेय के सीने में अचानक तेज दर्द उठा। उनकी हालत बिगड़ने पर स्वजन ने तत्काल 108 एंबुलेंस को सूचना दी। बताया गया कि करीब 25 से 30 मिनट बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंची, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) जखनिया ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर उपचार के लिए रेफर कर दिया।इसके बाद परिजन उन्हें निजी साधन से वाराणसी ले जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनकी सांस थम गई। निधन की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।धार्मिक आयोजनों में निभाते थे महत्वपूर्ण भूमिका,प्रहलाद पांडेय कर्मकांड के विद्वान ब्राह्मण थे। वह पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान एवं विभिन्न धार्मिक आयोजनों में अपनी सेवाएं देते थे। क्षेत्र में उनके कई शिष्य भी बताए जाते हैं। उनके आकस्मिक निधन की खबर सुनकर शिष्यों, परिचितों और ग्रामीणों की भीड़ उनके घर पहुंचने लगी। लोगों ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उनके दो पुत्र रोजी-रोजगार के सिलसिले में बाहर रहते हैं। प्रहलाद पांडेय अपने पीछे पत्नी और तीन पुत्रों का परिवार छोड़ गए हैं। पिता के निधन की सूचना के बाद स्वजन का रो-रोकर बुरा हाल रहा।अंतिम संस्कार के दौरान उनके मंझले पुत्र ने पिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार, शिष्य एवं शुभचिंतक मौजूद रहे। प्रहलाद पांडेय के निधन को क्षेत्र के लोगों ने धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

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