गोरखपुर में गोंड समाज का जाति प्रमाण पत्र पर हल्ला बोल

गोरखपुर में गोंड समाज का जाति प्रमाण पत्र पर हल्ला बोल गोरखपुर जिले में तहसीलदार और लेखपालों की मनमानी के कारण गोंड जाति को उसका संवैधानिक हक नहीं मिल पा रहा है। मूलनिवासी आदिवासी आर्मी ने आज 22 सितंबर को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव शंकर गोंड का कहना है कि गोंड समाज अनुसूचित जनजाति के प्रमाण पत्र से वंचित है। गोरखपुर मुख्यमंत्री का जिला है और यहाँ गोंड जाति की लड़ाई सांसद रहते हुए पुरजोर तरीके से सदन में भी उठाई गई थी। गोंड समाज के आंदोलनों में बढ़-चढ़ कर भागीदारी रखते थे। भाजपा सरकार आने के बावजूद जाति प्रमाण पत्र जारी कराने का वादा भी किया था लेकिन दुख की बात है कि विगत 10 वर्षों से एक भी गोंड जाति का जाति प्रमाण पत्र नहीं बना। इससे क्षुब्ध होकर मूलनिवासी आदिवासी आर्मी के नेतृत्व में जिलाधिकारी और सातों तहसीलों के तहसीलदारों को आवेदन किया गया परन्तु कोई कार्यवाही नहीं हुई। अब संगठन ने चेतावनी दी है - *"जाति प्रमाण-पत्र नहीं तो वोट नहीं"* विधायक घेरो अभियान चलाया जाएगा। संगठन ने सवाल उठाया है कि गोरखपुर के हर विधानसभा के विधायकों को शासनादेश देंगे कि विगत 5 वर्षों में आपके विधानसभा में कितने जाति प्रमाण पत्र निर्गत हुए और कितने बार आपने सदन में हमारे आरक्षण की आवाज उठाई। हमारे वोटों से माननीय विधायक तो बन जा रहे हैं परन्तु हमारे आरक्षण जो हमारा मूल हक अधिकार है उसकी लड़ाई कब लड़ेंगे? संगठन ने साफ कहा है कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में गोंड समाज भाजपा का बहिष्कार करेगा। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर 10 नवंबर 2026 तक सभी सातों तहसीलों में जाति प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया तो 15 नवंबर 2026 को बड़ा विशाल और उग्र आंदोलन गोंड समाज करने को बाध्य होगा। जिसकी सारी जिम्मेदारी जिला प्रशासन एवं शासन की होगी। इस दौरान प्रमुख रूप से जिलाध्यक्ष सूरज गोंड, जिला महामंत्री बाबूलाल गोंड, तहसील अध्यक्ष भोला प्रसाद गोंड, अधिवक्ता दिनेश चन्द्र गोंड, अधिवक्ता मनीष गोंड और अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।