श्रीमद् रुद्र भागवत कथा में गूंजा सनातन संस्कृति का संदेश अयोध्या से

श्रीमद् रुद्र भागवत कथा में गूंजा सनातन संस्कृति का संदेश अयोध्या से पधारे संत-महात्माओं ने किया कथा श्रवण, धर्म के मार्ग पर चलने का दिया संदेश बड़हलगंज। सरयू तट स्थित मुक्तिपथ पर आयोजित सप्त दिवसीय पितृ तृप्ति एवं रुद्र महायज्ञ के अंतर्गत श्रीमद् रुद्र भागवत कथा के दूसरे दिन अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने श्रद्धालुओं को कथा का रसपान कराया। इस दौरान अयोध्या धाम से पधारे अनेक संत-महात्माओं की उपस्थिति में सनातन संस्कृति, धर्म, अध्यात्म और ईश्वर की कृपा के महत्व पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में चिल्लूपार विधायक राजेश त्रिपाठी ने कहा कि इस धरती पर पहली बार अयोध्या धाम से इतनी बड़ी संख्या में संत-महात्माओं का आगमन हुआ है। सनातन धर्म में व्यास पीठ को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। संतों और महात्माओं की उपस्थिति से यह आयोजन आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष बन गया है। डॉ. रामानंद दास जी महाराज ने कहा कि विद्वान की वाणी को सही अर्थों में विद्वान ही समझ सकते हैं। उन्होंने कथा, ज्ञान और अध्यात्म के महत्व को रेखांकित किया। बड़ा भक्तमाल मंदिर के पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में सनातन धर्म के सामने अनेक चुनौतियां हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षित लोग भी सनातन पर आरोप लगा रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में सनातन धर्म की संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों की रक्षा के लिए सभी को जागरूक होकर आगे आना चाहिए। उन्होंने लोगों से सनातन धर्म के प्रति अपनी आस्था और प्रतिबद्धता मजबूत करने का आह्वान किया। दशरथ राजमहल के पीठाधीश्वर महंत स्वामी देवेंद्र प्रसादाचार्य जी महाराज ने कहा कि जब ईश्वर की कृपा होती है, तभी उनकी कथा श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। यह सभी के लिए बड़ी उपलब्धि है कि जिस पावन भूमि पर लोग अपने शरीर का त्याग करते हैं, उसी भूमि पर भगवान की कथा का रसपान करने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को धन अर्जित करते समय धर्म के मार्ग का भी ध्यान रखना चाहिए और अपने जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने श्रीमद् रुद्र भागवत कथा की महिमा बताते हुए कहा कि यह कथा जीवात्माओं के उद्धार का मार्ग प्रशस्त करने वाली मानी जाती है। कथा श्रवण से मनुष्य को धर्म, भक्ति और सदाचार की प्रेरणा मिलती है। इस अवसर पर अयोध्या स्थित जानकी घाट बड़ा स्थान के रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण जी महाराज सहित विभिन्न मठों और मंदिरों से पधारे संत-महात्मा उपस्थित रहे। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति और श्रद्धा के वातावरण में भावविभोर होकर कथा का श्रवण करते रहे।