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Gorakhpurलगभग १२ घंटे पहले

भागवत कथा के श्रवण से होता है पापों का होता है नाश : आचार्य अभिषेक जी

भागवत कथा के श्रवण से होता है पापों का होता है नाश : आचार्य अभिषेक जी

बडहलगंज : यह संसार दु:खों का सागर है।प्रत्येक प्राणी किसी न किसी तरह से दुखी व परेशान है।कोई स्वास्थ्य से दुखी है, कोई परिवार, कोई धन,तो कोई संतान को लेकर परेशान है।सभी परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए ईश्वर की आराधना ही एकमात्र मार्ग है। इसलिए व्यक्ति को अपने जीवन का कुछ समय हरिभजन में लगाना चाहिए। यह विचार बड़हलगंज विकास खण्ड की ग्राम पंचायत टांडा में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस वृंदावन से पधारे कथावाचक आचार्य अभिषेक जी महाराज ने व्यक्त किया। _____कथा में उमड़े श्रद्धालुओं को कथा का रस पान कराते हुए आचार्य अभिषेक जी महाराज ने कहा कि भागवत कथा वह अमृत है, जिसके पान से भय, भूख, रोग व संताप सब कुछ स्वत: ही नष्ट हो जाता है। श्रीमद्भागवत कथा के वाचन अथवा श्रवण से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है।उन्होंने कहा कि व्यक्ति को मन, बुद्धि, चित एकाग्र कर अपने आप को ईश्वर के चरणों में समर्पित करते हुए भागवत कथा को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए। श्रीमद भागवत कथा का श्रवण करने से जन्म जन्मांतर के पापों का नाश हो जाता है। श्रीमद भागवत कथा के श्रवण से महापापी धुंधकारी का भी उद्धार हो गया। कथा व्यास ने बताया कि धुंधकारी अति दुष्ट था। उसके पिता आत्मदेव भी उसके उत्पातों से दुखी होकर वन में चले गए थे। धुंधकारी वेश्याओं के साथ रहकर भोगों में डूब गया और एक दिन उन्हीं के द्वारा मार डाला गया। अपने कुकर्मों के फलस्वरूप वह प्रेत बन गया और भूख प्यास से व्याकुल रहने लगा। एक दिन व्याकुल धुंधकारी अपने भाई गोकर्ण के पास पहुंचा और संकेत रूप में अपनी व्यथा सुनाकर उससे सहायता की याचना की। गोकर्ण धुंधकारी के दुष्कर्मों को पहले से ही जानते थे, इसलिए धुंधकारी की मुक्ति के लिए गया श्राद्ध पहले ही कर चुके थे। लेकिन इस समय प्रेत रूप में धुंधकारी को पाकर गया श्राद्ध की निष्फलता देख उन्होंने पुन: विचार विमर्श किया। अंत में स्वयं सूर्य नारायण ने गोकर्ण को निर्देश किया कि श्रीमद्भागवत का पारायण कीजिए। उसका श्रवण मनन करने से ही मुक्ति होगी। श्रीमद् भागवत का पारायण हुआ। गोकर्ण वक्ता बने और धुंधकारी ने वायु रूप होने के कारण एक सात गांठों वाले बांस के भीतर बैठकर कथा का श्रवण मनन किया। सात दिनों में एक-एक करके बांस की सातों गांठे फट गईं। धुंधकारी भागवत के श्रवण मनन से सात दिनों में सात गांठे फोड़कर, पवित्र होकर, प्रेत योनि से मुक्त होकर भगवान के वैकुण्ठ धाम में चला गया। कथा के बाद प्रसाद के वितरण किया गया। प्रसाद ग्रहण करने के बाद श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद प्राप्त किया।आयोजन को सफल बनाने में नागेन्द्र नाथ तिवारी,राजेन्द्र नाथ तिवारी, रविन्द्र नाथ तिवारी, गजेन्द्र नाथ तिवारी, संजय तिवारी, डा सत्यम तिवारी, सतीष तिवारी, दीपक तिवारी, मनीष तिवारी, कृष्णा तिवारी, चन्द्र प्रकाश तिवारी, अजय तिवारी आदि लोग मौजूद रहे।

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