*कोहरौटिया में जलभराव से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, सड़क जाम के बाद

*कोहरौटिया में जलभराव से फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, सड़क जाम के बाद हरकत में आया प्रशासन; नाला सफाई से मिली राहत* सिकरीगंज/गोरखपुर। गोरखपुर के सिकरीगंज क्षेत्र अंतर्गत कोहरौटिया गांव में 12 जुलाई की रात हुई भारी बारिश के बाद पूरा गांव जलमग्न हो गया। गांव की गलियों, सड़कों और कई घरों के सामने पानी भर जाने से जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया। ग्रामीणों ने जलभराव का मुख्य कारण लंबे समय से जाम पड़ा नाला और उसकी नियमित सफाई न होना बताया। ग्रामीण राजबली ने बताया कि गांव के नालों की समय-समय पर सफाई नहीं कराई जाती, जिसके कारण हर वर्ष बरसात में गांव जलमग्न हो जाता है। वहीं ग्रामीण रमेश का कहना है कि करीब एक वर्ष से नाले की सफाई नहीं हुई थी। नाला जाम होने के कारण बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पाया और पूरे गांव में जलभराव की स्थिति बन गई। ग्रामीण राममिलन ने बताया कि उनके घर के सामने कमर तक पानी भर गया था, जिससे परिवार के लोगों का घर से निकलना भी मुश्किल हो गया। जलभराव से परेशान ग्रामीणों का आक्रोश रविवार सुबह लगभग 7 बजे फूट पड़ा। उन्होंने सिकरीगंज–गोरखपुर मुख्य मार्ग पर सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सड़क जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और राहगीरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सड़क जाम की सूचना मिलते ही सिकरीगंज पुलिस मौके पर पहुंची। उप निरीक्षक बैजनाथ बिन्द ने ग्रामीणों से वार्ता कर उन्हें शांत कराया और तत्काल नाले की सफाई कराने का आश्वासन दिया। पुलिस की पहल के बाद कुछ ही देर में जाम समाप्त हो गया और यातायात सामान्य रूप से बहाल हो गया। इसके बाद उप निरीक्षक बैजनाथ बिन्द ने जेसीबी मशीन मंगाकर जाम पड़े नाले की सफाई कराई। नाले से गाद और अवरोध हटते ही बारिश का रुका हुआ पानी तेजी से निकलने लगा, जिससे गांव में जलभराव की स्थिति में काफी राहत मिली। नाला साफ होने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। ग्रामीण विशाल ने कहा कि सिकरीगंज पुलिस की तत्परता और समय पर हुई कार्रवाई से गांव को बड़े नुकसान से बचा लिया गया। वहीं स्थानीय ग्रामीण संजय कुमार ने भी पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पुलिस की सक्रियता के कारण गांव को डूबने से बचाया जा सका। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बरसात शुरू होने से पहले गांव के सभी नालों की नियमित सफाई कराई जाए तथा जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।