स्वास्थ्य विभाग का अदृश्य सुपर सीएमओ सुलतानपुर। स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों
स्वास्थ्य विभाग का अदृश्य सुपर सीएमओ सुलतानपुर। स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों एक नाम बड़े अदब और उतने ही डर के साथ लिया जाता है बाबू विजय कुमार राय। विभागीय गलियारों में उन्हें सीएमओ कार्यालय के सबसे नायाब रत्न माना जाता है। फर्क बस इतना है कि बाकी रत्न राजाओं के दरबार सजाते थे जबकि ये साहब पूरे स्वास्थ्य तंत्र की पटकथा लिखते बताए जाते हैं। कहते हैं कि जिले में कौन-सा अस्पताल वैध कहलाएगा, कौन-सा अवैध होकर भी वैधता का सुख भोगेगा, किस नर्सिंग होम की फाइल उड़ान भरेगी और किस पैथोलॉजी का कागज़ महीनों धूल फांकेगा इसकी कुंजी बाबू साहब की मेज की दराज में सुरक्षित रहती है। स्वास्थ्य विभाग के जानकार तो यहां तक कहते हैं कि जिले के कई अस्पतालों, अल्ट्रासाउंड सेंटरों और नर्सिंग होमों के जन्मदाता भी वही हैं। यानी स्वास्थ्य सेवाओं का रजिस्ट्रेशन भी उनकी छत्रछाया में और संचालन भी उन्हीं की कृपा दृष्टि पर निर्भर! सीएमओ कार्यालय में हालात ऐसे बताए जाते हैं मानो विभाग में दो सीएमओ हों। एक सरकारी आदेश से नियुक्त और दूसरे बाबू विजय कुमार राय. जो बिना कुर्सी के भी पूरे रौब में सेकेंड सीएमओ की भूमिका निभाते नजर आते हैं। कर्मचारी अपने हक के लिए गुहार लगाते रहें, फाइलों के आगे माथा टेकते रहें लेकिन बाबू साहब के चेहरे की विजयश्री मुस्कान शायद ही कभी पिघलती हो। कर्मचारियों का दर्द यह है कि अधिकारों की फाइलें बाबूगिरी की भूलभुलैया में ऐसी फंसती हैं कि बाहर निकलते-निकलते दम तोड़ देती हैं। उधर विभागाध्यक्ष सबकुछ जानते हुए भी ऐसी चुप्पी साधे हैं मानो कार्यालय में सब रामराज्य चल रहा हो। सवाल यह है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग का संचालन नियम-कानून से हो रहा है या किसी अदृश्य सत्ता के इशारों पर। अब देखना यह है कि विभाग इस नायाब रत्न की चमक पर लग रहे सवालों का जवाब देता है या फिर हमेशा की तरह फाइलों के नीचे सच दबा रह जाएगा।