माया में बिखरोगे या भक्ति में निखरोगे? घघसरा में कथा के दूसरे दिन गूंजा आध्यात्मिक संदेश

घघसरा, गोरखपुर। नगर पंचायत घघसरा मेन मार्केट स्थित राधा कृष्ण मैरेज वाटिका में स्वर्गीय नेबूलाल जी की पुण्यस्मृति में अग्रहरि परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के द्वितीय दिवस काशी निवासी अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त वक्ता पूज्य राघव ऋषि जी ने जीवन के गूढ़ रहस्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा— “माया को चाहने वाला बिखर जाता है और भगवान को चाहने वाला निखर जाता है।” उन्होंने परीक्षित और शुकदेव प्रसंग के माध्यम से बताया कि जब जीव प्रभु मिलन के लिए आतुर होता है, तब संत स्वयं उसके जीवन में आते हैं। जीवन में संतवृत्ति जागृत करना ही सच्चे सुख की कुंजी है। उन्होंने कहा कि जन्म, मृत्यु, जरा और व्याधि के दुखों पर विचार करने से वैराग्य उत्पन्न होता है और पाप स्वतः छूट जाते हैं। ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने समझाया कि मनुष्य को सुनीति का मार्ग अपनाना चाहिए, क्योंकि वही उसे ध्रुव अर्थात् अविनाशी बनाता है। संतों की कृपा के बिना प्रभु की प्राप्ति संभव नहीं। यदि व्यक्ति परमात्मा के पीछे चलता है, तो संसार स्वयं उसके पीछे चलता है। भरत चरित्र के माध्यम से उन्होंने बताया कि कर्मफल को भगवान को अर्पित करने से अनंत फल मिलता है, लेकिन अनावश्यक आसक्ति मनुष्य को पतन की ओर ले जाती है। जीवन ऐसा जियो कि मृत्यु आने से पहले तैयारी पूर्ण हो, अन्यथा अवसर हाथ से निकल सकता है। सत्संग की महिमा बताते हुए ऋषि जी ने कहा कि मनुष्य जितना समय सत्संग में बिताता है, वही उसके जीवन का वास्तविक सार है। भागवत कथा आत्मदर्शन कराती है और जीव को उसके मूल स्वरूप से परिचित कराती है। कार्यक्रम में भजन “बदलेगा किस्मत सांवरिया” पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। पोथी पूजन एवं व्यास पूजन मुख्य यजमान श्रीमती सुभावती देवी एवं उनके पुत्रों द्वारा सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रभाकर दूबे, अशोक अग्रहरि, रविन्द्र अग्रहरि (प्रधान), राजेश त्रिपाठी (सभासद), अरविंद अग्रहरि, कृष्णमोहन कसौधन, उदयनाथ चौरसिया, राम जनक मौर्य, सुरेन्द्र मौर्य, कौशल सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम संयोजक अशोक अग्रहरि ने बताया कि रविवार को जड़भरत प्रसंग, नृसिंह अवतार एवं प्रह्लाद चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया जाएगा।