इन्दूपुर में भव्य रामलीला: हनुमान जी का लंका गमन, लंका दहन और

इन्दूपुर में भव्य रामलीला: हनुमान जी का लंका गमन, लंका दहन और रामसेतु निर्माण का हुआ मंचन इन्दूपुर । बांसगांव सन्देश । श्री श्री 108 पवहारी महाराज जी के शिष्यों द्वारा इन्दूपुर स्थित रामलीला मैदान में गुरुवार को रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का भव्य एवं भावपूर्ण मंचन किया गया। महराज जी के संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों ने अपने अभिनय से दर्शकों को रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों से रूबरू कराया। रामलीला की शुरुआत समुद्र पार करने के लिए वानर सेना के परामर्श से हुई । जामवंत जी ने हनुमान जी को उनकी शक्ति का स्मरण कराया और भगवान श्रीराम के गुणों एवं महिमा का वर्णन किया। इसके बाद हनुमान जी समुद्र लांघकर लंका की ओर प्रस्थान करते हैं। मार्ग में माता सुरसा की परीक्षा में सफल होने तथा छाया पकड़ने वाली राक्षसी का वध करने का प्रसंग मंचित किया गया। लंका पहुंचने पर हनुमान जी ने लंकिनी पर प्रहार कर लंका में प्रवेश किया और विभीषण से भेंट कर माता सीता का पता जाना। इसके बाद अशोक वाटिका में पहुंचकर माता सीता को देखकर हनुमान जी भावुक हुए। वहीं रावण द्वारा माता सीता को भयभीत करने, त्रिजटा-सीता संवाद तथा हनुमान जी और सीता जी के बीच संवाद का प्रभावशाली मंचन हुआ। इसके बाद हनुमान जी ने अशोक वाटिका में विध्वंस किया और अक्षय कुमार का वध किया। मेघनाद द्वारा हनुमान जी को नागपाश में बांधकर रावण की सभा में ले जाने तथा हनुमान-रावण संवाद ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इसके बाद हनुमान जी द्वारा लंका दहन का भव्य मंचन किया गया। लीला में आगे हनुमान जी का माता सीता से पुनः भेंट कर चूड़ामणि प्राप्त करना, समुद्र पार लौटना, वानर सेना के साथ मधुबन पहुंचना और श्रीराम से भेंट करने का प्रसंग दिखाया गया। इसके बाद भगवान श्रीराम सेना सहित समुद्र तट पर पहुंचे। मंदोदरी-रावण संवाद, विभीषण का अपमान और भगवान श्रीराम द्वारा विभीषण को लंका का राजा बनाने की प्रतिज्ञा का मंचन किया गया। समुद्र पार करने के प्रसंग में भगवान श्रीराम के समुद्र पर क्रोधित होने, समुद्र देव द्वारा विनती करने तथा नल-नील द्वारा समुद्र पर सेतु निर्माण का दृश्य प्रस्तुत किया गया। इसके साथ रामेश्वर की स्थापना, श्रीराम का समुद्र पार कर सुबेल पर्वत पर विश्राम करना और अंगद का दूत बनकर लंका की सभा में जाना भी दिखाया गया। अंगद ने रावण की सभा में अपना पैर जमाकर अपनी शक्ति का परिचय दिया। इसके बाद रावण का मुकुट श्रीराम के पास फेंकने और अंगद के वापस लौटने के प्रसंग के साथ भगवान श्रीराम के जयघोष से रामलीला का समापन हुआ। रामलीला का मंचन रिंकू तिवारी आचार्य, आलोक तिवारी, श्लोक तिवारी सहित पवहारी महाराज जी के संस्कृत महाविद्यालय के छात्रों द्वारा किया गया। कलाकारों के शानदार अभिनय और संवाद प्रस्तुति ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।