यूपी गवाहों के बयानों में पुलिस नहीं कर पाएगी अपनी तरफ से

यूपी गवाहों के बयानों में पुलिस नहीं कर पाएगी अपनी तरफ से बदलाव, DGP ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर जारी की सख्त गाइडलाइंस उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्णा ने पुलिस जांच (विवेचना) में पारदर्शिता लाने और पुलिसकर्मियों की मनमानी रोकने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो अलग-अलग मामलों में दिए गए आदेशों के अनुपालन में यह कदम उठाया गया है। प्रमुख निर्देश और बदलाव: बयानों में हेरफेर पर रोक: * पुलिस गवाहों के बयानों को तोड़-मरोड़कर या अपनी ओर से शब्द जोड़कर दर्ज नहीं कर सकेगी। गवाह जिस भाषा या बोली में बयान देगा, उसे हूबहू दर्ज करना होगा। आरोपी को दोषी ठहराने की नीयत से leading या सूचक सवाल (धारा 180 BNSS) पूछने पर प्रतिबंध रहेगा; केवल स्पष्टीकरण के लिए सवाल पूछे जा सकेंगे। लापरवाही पर होगी सख्त कार्रवाई: * नियमों की अनदेखी करने पर जांच अधिकारी (IO) के साथ-साथ पर्यवेक्षण अधिकारी (Supervising Officer) पर भी सीधी कार्रवाई होगी। डिजिटल साक्ष्य और फॉरेंसिक जांच बाध्यकारी: * तलाशी, जप्ती व निरीक्षण की डिजिटल प्रक्रिया 'ई-साक्ष्य' (e-Sakshya) ऐप पर अपलोड की जाएगी। 7 साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में घटनास्थल पर फॉरेंसिक विशेषज्ञों का निरीक्षण और वीडियोग्राफी/फोटोग्राफी अनिवार्य होगी। पासपोर्ट सत्यापन (Passport Verification) में पारदर्शिता: * पासपोर्ट सत्यापन की रिपोर्ट भेजते समय आवेदक के खिलाफ दर्ज सभी पुराने व वर्तमान केसों का ब्योरा देना अनिवार्य होगा। केस छिपाने या गलत रिपोर्ट भेजने पर दोषी पुलिसकर्मी व जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त एक्शन लिया जाएगा।