केवई में हरियाली पर आरी का वार! 10 दिनों में आधा सैकड़ा से ज्यादा पेड़ों की कटान, जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर उठे सवाल

केवई में हरियाली पर आरी का वार! 10 दिनों में आधा सैकड़ा से ज्यादा पेड़ों की कटान, जिम्मेदार विभागों की भूमिका पर उठे सवाल स्थानीय लोगों का आरोप बिना अनुमति चली कटान, वन विभाग बोला—‘जानकारी नहीं’ नीम, महुआ और आम के पेड़ों की जड़ें तक उखाड़ी गईं, सबूत मिटाने की आशंका जांच और कार्रवाई की मांग तेज, जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की अपेक्षा फतेहपुर । राधानगर थाना क्षेत्र की केवई ग्राम पंचायत में कथित रूप से बड़े पैमाने पर हुई पेड़ों की कटान ने पर्यावरण संरक्षण और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि बीते लगभग दस दिनों के भीतर अंदौली क्षेत्र से जुड़े एक लकड़ी ठेकेदार द्वारा कई बागों में आम, नीम, महुआ और अमरूद के करीब 60 से 70 पेड़ काट दिए गए। आरोप यह भी है कि कुछ स्थानों पर जेसीबी मशीन लगवाकर पेड़ों के अवशेष और जड़ों को भी उखाड़ने का प्रयास किया गया, ताकि कटान के निशान समाप्त हो जाएं।ग्रामीणों के अनुसार, कई स्थानों पर आज भी नीम, महुआ और अमरूद के पेड़ों की जड़ें स्पष्ट रूप से देखी जा सकती हैं, जो हाल ही में हुई कटान की ओर संकेत करती हैं। मामले की जानकारी मिलने पर मीडिया टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया, जहां कई ग्रामीणों ने बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटान होने का दावा किया। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि इतने बड़े स्तर पर पेड़ों की कटान हुई है, तो क्या इसकी अनुमति ली गई थी? यदि अनुमति नहीं थी, तो फिर यह गतिविधि इतने दिनों तक बिना रोक-टोक कैसे चलती रही? क्षेत्र में चर्चा का विषय यह भी बना हुआ है कि क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर निगरानी व्यवस्था पूरी तरह निष्क्रिय रही।मामले में जब संबंधित वन विभाग के क्षेत्रीय कर्मी से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि यह मामला उनकी जानकारी में नहीं है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर हुई कटान से अनभिज्ञता का दावा स्वयं कई सवाल खड़े करता है। अब लोगों की मांग है कि वन विभाग और पुलिस प्रशासन पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करे कि कटान वैध अनुमति के तहत हुई या नियमों को दरकिनार कर अंजाम दी गई।गांव में यह भी चर्चा है कि कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका की जांच होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, इसलिए प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। *योगी सरकार लगातार वृक्षारोपण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रही है और हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर हरित क्षेत्र बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में यदि बिना अनुमति बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटान हुई है, तो यह न केवल पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है बल्कि शासन की मंशा के भी विपरीत है। अब निगाहें वन विभाग, पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो अवैध कटान का यह सिलसिला भविष्य में और बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके ।