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Gorakhpurलगभग २ घंटे पहले

बेलघाट के बलुआ भवानी बक्स सिंह गांव में भागवत कथा का दूसरा

बेलघाट के बलुआ भवानी बक्स सिंह गांव में भागवत कथा का दूसरा

बेलघाट के बलुआ भवानी बक्स सिंह गांव में भागवत कथा का दूसरा दिन बना भक्ति का सागर, शुकदेव–परीक्षित प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु” गोरखपुर (बेलघाट)। बलुआ भवानी बक्स सिंह गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन पूरा गांव मानो भक्ति के सागर में डूब गया। सच्चा बाबा आश्रम, प्रयागराज से पधारे आचार्य मार्कंडेय जी महाराज ने जब शुकदेव जन्म, राजा परीक्षित के श्राप और अमर भागवत कथा का वर्णन किया, तो पंडाल में बैठे श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और दिल भक्ति भाव से भर उठा। कथा व्यास ने बेहद मार्मिक शब्दों में कहा कि श्रीमद्भागवत कोई ग्रंथ नहीं, बल्कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण का जीवंत स्वरूप है—जिसका हर अक्षर भक्तों के जीवन को प्रकाशित करता है। उन्होंने बताया कि इस कथा का श्रवण मनुष्य को उन ऊंचाइयों तक ले जाता है, जहां दान, व्रत और तीर्थ भी नहीं पहुंचा पाते। राजा परीक्षित और शुकदेव जी के प्रसंग को सुनाते हुए आचार्य जी ने उस क्षण को जीवंत कर दिया, जब एक छोटी सी भूल ने एक महान राजा को श्राप का भागी बना दिया। लेकिन उसी श्राप ने उन्हें मोक्ष के मार्ग तक पहुंचा दिया। यह सुनकर हर श्रोता के मन में यह भाव जाग उठा कि जीवन में गलती होना बड़ी बात नहीं, बल्कि समय रहते उसका प्रायश्चित करना ही सबसे बड़ा धर्म है। कुंती माता के उस भाव को भी उन्होंने बड़े ही करुण स्वर में प्रस्तुत किया, जिसमें वे सुख में नहीं, बल्कि दुख में भगवान के दर्शन की कामना करती हैं। यह सुनकर कई श्रद्धालु भावुक हो उठे और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। कथा के बीच-बीच में गूंजते भजन और श्रद्धालुओं की तालियों ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। लोग कभी मंत्रमुग्ध होकर कथा सुनते तो कभी भक्ति गीतों पर झूम उठते। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो पूरा गांव एक साथ भगवान की शरण में आ गया हो। कार्यक्रम की शुरुआत यजमान इंदिरा त्रिपाठी एवं उनके पति राम तारक त्रिपाठी द्वारा व्यास पीठ की आरती से हुई। दूसरे दिन भी भारी संख्या में महिला-पुरुष कथा श्रवण के लिए पहुंचे और देर तक भक्ति रस में डूबे रहे।

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