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Gazipurलगभग १ घंटा पहले

मनरेगा में अनियमितता के आरोप, धरातल पर काम नहीं और कागजों में

मनरेगा में अनियमितता के आरोप, धरातल पर काम नहीं और कागजों में

मनरेगा में अनियमितता के आरोप, धरातल पर काम नहीं और कागजों में दर्ज हो रही मजदूरों की हाजिरी जखनिया ब्लॉक की कई ग्राम पंचायतों में योजना की पारदर्शिता पर उठे सवाल, मस्टर रोल और कार्यस्थल के भौतिक सत्यापन की मांग जखनिया। विकासखंड जखनिया की कई ग्राम पंचायतों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कराए जा रहे कार्यों को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर मनरेगा के कार्य कागजों में संचालित दिखाए जा रहे हैं, जबकि मौके पर कार्य की स्थिति स्पष्ट दिखाई नहीं दे रही है। वहीं, अभिलेखों में मजदूरों की उपस्थिति दर्ज किए जाने की बात भी सामने आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ गांवों में विकास कार्य कराना है। ऐसे में यदि कार्य स्वीकृत होने के बावजूद मौके पर पर्याप्त श्रमिक दिखाई नहीं देते और अभिलेखों में लगातार मजदूरों की हाजिरी दर्ज होती है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है। कागजों में रोजगार, मौके पर स्थिति संदिग्ध ग्रामीणों के अनुसार, कुछ ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यों की वास्तविक स्थिति और सरकारी अभिलेखों में दर्ज प्रगति के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि किसी कार्यस्थल पर मजदूर काम करते हुए नहीं दिखाई दे रहे हैं, तो उनकी उपस्थिति किस आधार पर दर्ज की गई और भुगतान की प्रक्रिया किस आधार पर आगे बढ़ी, इसकी जांच होनी चाहिए। ग्रामीणों ने संबंधित ग्राम पंचायतों में स्वीकृत कार्यों, मस्टर रोल, मजदूरों की उपस्थिति, कार्य की प्रगति और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है। जियो-टैग फोटो और मस्टर रोल की जांच से खुलेगा राज ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा कार्यों से संबंधित अभिलेखों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के साथ मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए। कार्यस्थल पर जाकर यह देखा जाए कि स्वीकृत कार्य वास्तव में हुआ है या नहीं, कितने मजदूरों ने कार्य किया तथा अभिलेखों में दर्ज मजदूरों की संख्या और वास्तविक उपस्थिति में कोई अंतर तो नहीं है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मस्टर रोल, जियो-टैग फोटो, कार्य की प्रगति, मजदूरी भुगतान और कार्यस्थल का स्थलीय निरीक्षण कराकर पूरी स्थिति स्पष्ट की जाए। अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर भी उठे सवाल ग्रामीणों ने ब्लॉक और जिला स्तर पर मनरेगा कार्यों की निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए नियमित निरीक्षण और अभिलेखों का सत्यापन जरूरी है। यदि कहीं शिकायत मिलती है तो केवल कागजी जांच के बजाय मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति देखी जानी चाहिए। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद यदि समय रहते प्रभावी जांच नहीं होती है तो अनियमितता की आशंका बनी रहती है। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए शिकायत वाली ग्राम पंचायतों की जांच कराने की मांग की है। जांच हुई तो सामने आ सकती है वास्तविक स्थिति ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी से मांग की है कि जखनिया विकासखंड की शिकायत वाली ग्राम पंचायतों में विशेष टीम गठित कर स्थलीय जांच कराई जाए। जांच के दौरान मस्टर रोल, जियो-टैग फोटो, भुगतान विवरण और कार्यस्थल का मिलान कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में फर्जी हाजिरी, बिना कार्य के भुगतान अथवा अन्य वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। निष्पक्ष स्थलीय जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मनरेगा कार्यों में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जांच को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रखते हुए मौके पर सत्यापन कराया जाए, ताकि मनरेगा योजना की पारदर्शिता और पात्र श्रमिकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।

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