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Gorakhpur१० दिन पहले

रिया हॉस्पिटल में सिजेरियन के बाद प्रसूता की मौत

रिया हॉस्पिटल में सिजेरियन के बाद प्रसूता की मौत

स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर उठे सवाल, कार्रवाई की मांग तेज कौड़ीराम गोरखपुर।ग्रामीण इलाकों में संचालित निजी अस्पतालों की मनमानी और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाह निगरानी ने एक और परिवार को उजाड़ दिया। कौड़ीराम के बड़हलगंज रोड स्थित रिया हॉस्पिटल में सिजेरियन ऑपरेशन के बाद प्रसूता की हालत बिगड़ गई। खून का रिसाव बंद न होने के बावजूद समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल सका, जिसके चलते महिला की गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई। घटना गगहा थाना क्षेत्र के बलुआ मंदिर के सामने स्थित रिया हॉस्पिटल की है। मृतका बांसगांव थाना क्षेत्र के विशनपुर पाली निवासी कमलेश की पत्नी सोनी (30 वर्ष) बताई जा रही है। परिजनों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती करने के बाद डॉक्टरों ने प्लेटलेट कम होने की बात कहकर उनसे पैसे लिए और बाहर से प्लेटलेट मंगवाकर चढ़ाई गई। इसके बाद जोखिमपूर्ण स्थिति में भी सिजेरियन ऑपरेशन कर दिया गया। ऑपरेशन के बाद महिला का खून लगातार बहता रहा, लेकिन अस्पताल प्रबंधन हालात संभालने में पूरी तरह विफल रहा। जब मरीज की स्थिति बेहद नाजुक हो गई, तब अस्पताल प्रबंधन ने महिला को अपनी गाड़ी से गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में भेज दिया, जहां इलाज के दौरान प्रसूता की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन से पहले ही अस्पताल ने पूरी रकम जमा करा ली थी और गंभीर हालत होने पर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया गया। महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। परिजनों ने रिया हॉस्पिटल के सामने शव रखकर प्रदर्शन किया और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। सूचना पर पहुंची पुलिस ने हालात को नियंत्रित किया। परिजनों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच, अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, अस्पताल को सील करने और मृतका के तीन बच्चों के भरण-पोषण के लिए आर्थिक मुआवजा देने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में कई निजी अस्पताल बिना मानकों और विशेषज्ञ सुविधाओं के संचालित हो रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर जांच नहीं की जाती। सवाल यह उठता है कि क्या रिया हॉस्पिटल के पास सिजेरियन ऑपरेशन की वैध अनुमति थी और आपात स्थिति से निपटने के पर्याप्त संसाधन मौजूद थे? मृतका की मौत ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। तीन छोटे बच्चों के सिर से मां का साया उठ चुका है, जबकि प्रशासन की कार्रवाई अब भी सवालों के घेरे में है।

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